Parmatma Prakash (Gujarati Hindi) (English transliteration).

< Previous Page   Next Page >


Page 551 of 565
PDF/HTML Page 565 of 579

 

background image
adhikAr-2 dohA-214 ]paramAtmaprakAsha [ 551
विसयसुहरयाणं दुल्लहो जो हु लोए
जयउ सिवसरूवो केवलो को वि बोहो ।।२१४।।
परमपदगतानां भासको दिव्यकायः
मनसि मुनिवराणां मोक्षदो दिव्ययोगः
विषयसुखरतानां दुर्लभो यो हि लोके
जयतु शिवस्वरूपः केवलः कोऽपि बोधः
।।२१४।।
जयउ सर्वोत्कर्षेण वृद्धिं गच्छतु कोऽसौ दिव्व-काओ परमौदारिक-
शरीराभिधानदिव्यकायस्तदाधारो भगवान् कथंभूतः भासओ दिवाकरसहस्रादप्यधिक-
तेजस्त्वाद्भासकः प्रकाशकः केषां कायः परम-पय-गयाणं परमानन्तज्ञानादिगुणास्पदं यदर्हत्पदं
तत्रगतानाम् न केवलं दिव्यकायो जयतु दिव्व-जोओ द्वितीयशुक्लध्यानाभिधानो
वीतरागनिर्विकल्पसमाधिरूपो दिव्ययोगः कथंभूतः मोक्खदो मोक्षप्रदायकः क्व जयतु
मणसि मनसि केषाम् मुणिवराणं मुनिपुङ्गवानाम् न केवलं योगो जयतु केवलो को वि
bhAvArtha(1) param anant gnAnAdiguNanun je sthAn chhe evA arhantapadane prApta
jIvonun hajAro sUryathI paN adhik tejathI prakAshak evA, param audArik sharIr nAmanun je
divyakAy ane tenA AdhArabhUt bhagavAn jayavant varto
sarvotkarShathI vRuddhi pAmo.
(2) munipungavonA manamAn mokShadAyak bIjA shukladhyAn nAmano vItarAg nirvikalpa samAdhirUp
गाथा२१४
अन्वयार्थ :[दिव्यकायः ] जिसका ज्ञान आनंदरूप शरीर है, अथवा
[परमपदगतानां भासकः ] अरहंतपदको प्राप्त हुए जीवोंका प्रकाशमान परमौदारिकशरीर है,
ऐसा परमात्मतत्त्व [जयतु ] सर्वोत्कर्षपनेसे वृद्धिको प्राप्त होवे
जो परमौदारिकशरीर ऐसा है,
कि जिसका तेज हजारों सूर्योंसे अधिक है, अर्थात् सकल प्रकाशी है जो परमपदको प्राप्त हुए
केवली हैं, उनको तो साक्षात् दिव्यकाय पुरुषाकार भासता है, [मुनिवराणां ] और जो महामुनि
हैं, उनके [मनसि ] मनमें [दिव्ययोगः ] द्वितीय शुक्लध्यानरूप वीतराग निर्विकल्पसमाधिरूप
भास रहा है, [मोक्षदः ] और मोक्षका देनेवाला है
[केवलः कोऽपि बोधः ] जिसका
केवलज्ञान स्वभाव है, ऐसी अपूर्व ज्ञानज्योति [शिवस्वरूपः ] सदा कल्याणरूप है [लोके ]
लोकमें [विषयसुखरतानां ] शिवस्वरूप अनन्त परमात्माकी भावनासे उत्पन्न जो परमानन्द
अतीन्द्रियसुख उससे विपरीत जो पाँच इन्द्रियोंके विषय उनमें जो आसक्त हैं, उनको [यः हि ]