Parmatma Prakash (Gujarati Hindi) (itrans transliteration).

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Shri Digambar Jain Swadhyay Mandir Trust, Songadh - 364250
shrI diga.nbar jain svAdhyAyama.ndir TrasTa, sonagaDh - 364250
गमनविहिनानि निःक्रियाणि चलनक्रियाविहीनानि किं कृत्वा जीउ वि पुग्गलु परिहरिवि
जीवपुद्गलौ परिहृत्य पभणहिं एवं प्रभणन्ति कथयन्ति के ते णाणपवीण भेदाभेद-
रत्नत्रयाराधका विवेकिन इत्यर्थः तथाहि जीवानां संसारावस्थायां गतेः सहकारिकारण-
भूताः कर्मनोकर्मपुद्गलाः कर्मनोकर्माभावात्सिद्धानां निःक्रियत्वं भवति पुद्गलस्कन्धानां तु
कालाणुरूपं कालद्रव्यं गतेर्बहिरङ्गनिमित्तं भवति
अनेन किमुक्त भवति अविभागिव्यवहार-
कालसमयोत्पत्तौ मन्दगतिपरिणतपुद्गलपरमाणुः घटोत्पत्तौ कुम्भकारवद्वहिरङ्गनिमित्तेन व्यञ्जको
व्यक्ति कारको भवति
कालद्रव्यं तु मृत्पिण्डवदुपादानकारणं भवति तस्य तु
पुद्गलपरमाणोर्मन्दगतिगमनकाले यद्यपि धर्मद्रव्यं सहकारिकारणमस्ति तथापि कालाणुरूपं
निश्चयकालद्रव्यं च सहकारिकारणं भवति
सहकारिकारणानि तु बहून्यपि भवन्ति मत्स्यानां
जातिके पुद्गल सहायी हैं और कर्म नोकर्मके अभावसे सिद्धोंके निःक्रियपना है, गमनागमन
नहीं है पुद्गलके स्कन्धोंको गमनका बहिरंग निमित्तकारण कालाणुरूप कालद्रव्य है इससे
क्या अर्थ निकला ? यह निकला कि निश्चयकालकी पर्याय जो समयरूप व्यवहारकाल उसकी
उत्पत्तिमें मंद गतिरूप परिणत हुआ अविभागी पुद्गलपरमाणु कारण होता है
समयरूप
व्यवहारकालका उपादानकारण निश्चयकालद्रव्य है, उसीको एक समयादि व्यवहारकालका
मूलकारण निश्चयकालाणुरूप कालद्रव्य है, उसीकी एक समयादिक पर्याय है, पुद्गल
परमाणुकी मंदगति बहिरंग निमित्तकारण है, उपादानकारण नहीं है, पुद्गलपरमाणु आकाशके
प्रदेशमें मंदगतिसे गमन करता है, यदि शीघ्र गतिसे चले तो एक समयमें चौदह राजू जाता
है, जैसे घटपर्यायकी उत्पत्तिमें मूलकारण तो मिट्टीका डला है, और बहिरंगकारण कुम्हार है,
वैसे समयपर्यायकी उत्पत्तिमें मूलकारण तो कालाणुरूप निश्चयकाल है, और बहिरंग
निमित्तकारण पुद्गलपरमाणु है
पुद्गलपरमाणुकी मंदगतिरूप गमन समयमें यद्यपि धर्मद्रव्य
सहकारी है, तो भी कालाणुरूप निश्चयकाल परमाणुकी मंदगतिका सहायी जानना परमाणुके
निमित्तसे तो कालका समयपर्याय प्रगट होता है, और कालके सहायसे परमाणु मंदगति करता
kAraNabhUt Che ane karmanokarmanA abhAvathI siddho niShkriy Che. pudgalaska.ndhone paN gatinu.n bahira.ng
nimitta kALANurUp kALadravya Che. AthI shu.n kahevAyu.n? AthI e kahevAyu.n ke jevI rIte ghaDAnI
utpattimA.n ku.nbhAr bahira.nganimittathI vya.njak
vyaktikArakChe tevI rIte vyavahArakALarUp avibhAgI
samayanI utpattimA.n ma.ndagatie pariNat pudgalaparamANu bahira.ng nimittathI vya.njak-vyaktikArak Che.
jem (ghaTaparyAyanI utpattimA.n) mATIno pi.nD upAdAn kAraN Che tem (samay paryAyanI utpattimA.n)
kALadravya upAdAn kAraN Che ane te pudgalaparamANunA ma.ndagatithI gamanakALe joke dharmadravya paN
sahakArI kAraN Che topaN kALANurUp nishchay kALadravya paN sahakArI kAraN Che.
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