Parmatma Prakash (Gujarati Hindi) (Malayalam transliteration).

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Shri Digambar Jain Swadhyay Mandir Trust, Songadh - 364250
ശ്രീ ദിഗംബര ജൈന സ്വാധ്യായമംദിര ട്രസ്ട, സോനഗഢ - ൩൬൪൨൫൦
൧൭൮ ]യോഗീന്ദുദേവവിരചിത: [ അധികാര-൧ : ദോഹാ-൧൦൯
जोइज्जइ द्रश्यते तिं तेन पुरुषेण तेन कारणेन वा कोऽसौ द्रश्यते बंभु परु
ब्रह्मशब्दवाच्यः शुद्धात्मा कथंभूतः परः उत्कृष्टः अथवा पर इति पाठे नियमेन न केवलं
द्रश्यते जाणिज्जइ ज्ञायते तेन पुरुषेण तेन कारणेन वा सोइ स एव शुद्धात्मा केन कारणेन
बंभु मुणेविणु जेण लहु येन पुरुषेण येन कारणेन वा ब्रह्मशब्दवाच्यनिर्दोषिपरमात्मानं मत्वा
ज्ञात्वा पश्चात्
गम्मिज्जइ परलोइ तेनैव पूर्वोक्ते न ब्रह्मस्वरूपपरिज्ञानपुरुषेण तेनैव कारणेन वा
गम्यते
क्व परलोके परलोकशब्दवाच्ये परमात्मतत्त्वे किं च योऽसौ शुद्धनिश्चयनयेन
शक्ति रूपेण केवलज्ञानदर्शनस्वभावः परमात्मा स सर्वेषां सूक्ष्मैकेन्द्रियादिजीवानां शरीरे पृथक्
पृथग्रूपेण तिष्ठति स एव परमब्रह्मा स एव परमविष्णुः स एव परमशिवः इति, व्यक्ति रूपेण
पुनर्भगवानर्हन्नैव मुक्ति गतसिद्धात्मा वा परमब्रह्मा विष्णुः शिवो वा भण्यते
तेन नान्यः कोऽपि
परिकल्पितः जगद्वयापी तथैवैको परमब्रह्मा विष्णुः शिवो वास्तीति अयमत्रार्थः यत्रासौ
[दृश्यते ] देखा जाता है, [तेन ] उसी पुरुषसे निश्चयसे [स एव ] वही शुद्धात्मा [ज्ञायते ]
जाना जाता है, [येन ] जो पुरुष जिस कारण [ब्रह्म मत्वा ] अपना स्वरूप जानकर [परलोके
लघु गम्यते ] परमात्मतत्त्वमें शीघ्र ही प्राप्त होता है
भावार्थ :जो कोई शुद्धात्मा अपना स्वरूप शुद्ध निश्चयनयकर शक्तिरूपसे
केवलज्ञान केवलदर्शन स्वभाव है, वही वास्तवमें (असलमें) परमेश्वर है परमेश्वरमें और
जीवमें जाति-भेद नहीं है, जब तक कर्मोंसे बँधा हुआ है, तब तक संसारमें भ्रमण करता है
सूक्ष्म बादर एकेन्द्रियादि जीवोंके शरीरमें जुदा जुदा तिष्ठता है, और जब कर्मोंसे रहित हो जाता
है, तब सिद्ध कहलाता है
संसार-अवस्थामें शक्तिरूप परमात्मा है, और सिद्ध-अवस्थामें
व्यक्तिरूप है यही आत्मा परब्रह्म, परमविष्णु शक्तिरूप है, और प्रगटरूपसे भगवान् अर्हंत
अथवा मुक्तिको प्राप्त हुए सिद्धात्मा ही परमब्रह्मा, परमविष्णु, परमशिव कहे जाते हैं यह
निश्चयसे जानो ऐसा कहनेसे अन्य कोई भी कल्पना किया हुआ जगत्में व्यापक परमब्रह्म,
परमविष्णु, परमशिव नहीं सारांश यह है कि जिस लोकके शिखर पर अनंत सिद्ध विराज
रहे हैं, वही लोकका शिखर परमधाम ब्रह्मलोक वहीं विष्णुलोक और वही शिवलोक है, अन्य
ഭാവാര്ഥ:ശുദ്ധനിശ്ചയനയഥീ ശക്തിരൂപേ കേവളജ്ഞാനദര്ശനസ്വഭാവവാളാ ജേ പരമാത്മാ ഛേ തേ,
സര്വ സൂക്ഷ്മ ഏകേന്ദ്രിയാദി ജീവോനാ ശരീരമാം പൃഥക് പൃഥക്രൂപേ രഹേ ഛേ, തേ ജ പരമബ്രഹ്മാ ഛേ തേ ജ
പരമ വിഷ്ണു ഛേ അനേ തേ ജ പരമശിവ ഛേ, അനേ വ്യക്തിരൂപേ ഭഗവാന അര്ഹംത ജ അഥവാ മുക്തിഗത
സിദ്ധാത്മാ ജ പരമബ്രഹ്മാ ഛേ, വിഷ്ണു ഛേ, ശിവ ഛേ, തേനാഥീ ബീജോ കോഈ കല്പിത ജഗദ്വ്യാപീ തേമ
ജ ഏക പരബ്രഹ്മ, വിഷ്ണു, ശിവ നഥീ.