Parmatma Prakash (Gujarati Hindi) (Malayalam transliteration).

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Shri Digambar Jain Swadhyay Mandir Trust, Songadh - 364250
ശ്രീ ദിഗംബര ജൈന സ്വാധ്യായമംദിര ട്രസ്ട, സോനഗഢ - ൩൬൪൨൫൦
അധികാര-൨ : ദോഹാ-൭൦ ]പരമാത്മപ്രകാശ: [ ൩൩൭
है, अर्थात् विषयकषायोंसे तन्मयी है, तब तक हे जीव; किसी देशमें जा, तीर्थादिकोंमें
भ्रमण कर, अथवा चाहे जैसा आचरण कर, किसी प्रकार मोक्ष नहीं है सारांश यह है,
कि कामक्रोधादि खोटे ध्यानसे यह जीव भोगोंके सेवनके बिना भी शुद्धात्मभावनासे च्युत
हुआ, अशुद्ध भावोंसे कर्मोंको बाँधता है इसलिये हमेशा चित्तकी शुद्धता रखनी चाहिये
ऐसा ही कथन दूसरी जगह भी ‘‘कंखिद’’ इत्यादि गाथासे कहा है, इस लोक और
परलोकके भोगोंका अभिलाषी और कषायोंसे कालिमारूप हुआ अवर्तमान विषयोंका वाँछक
और वर्तमान विषयोंमें अत्यन्त आसक्त हुआ अति मोहित होनेसे भोगोंको नहीं भोगता हुआ
भी अशुद्ध भावोंसे कर्मोंको बाँधता है
।।७०।।
आगे शुभ, अशुभ और शुद्ध इन तीन उपयोगोंको कहते हैं
कथमपि केनापि प्रकारेण मोक्षो नास्ति पर परं नियमेन कस्मात् चित्तहं सुद्धि ण चित्तस्य
शुद्धिर्न जं जि यस्मादेव कारणात् इति तथाहि ख्यातिपूजालाभद्रष्टश्रुतानुभूत-
भोगाकांक्षारूपदुर्ध्यानैः शुद्धात्मानुभूतिप्रतिपक्षभूतैर्यावत्कालं चित्तं रञ्जितं मूर्च्छितं तन्मयं तिष्ठति
तावत्कालं हे जीव क्वापि देशान्तरं गच्छ किमप्यनुष्ठानं कुरु तथापि मोक्षो नास्तीति
अत्र
कामक्रोधादिभिरपध्यानैर्जीवो भोगानुभवं विनापि शुद्धात्मभावनाच्युतः सन् भावेन कर्माणि
बध्नाति तेन कारणेन निरन्तरं चित्तशुद्धिः कर्तव्येति भावार्थः
।। तथा चोक्त म्
‘‘कंखिदकलुसिदभूदो हु कामभोगेहिं मुच्छिदो जीवो णवि भुञ्जंतो भोगे बंधदि भावेण
कम्माणि ।।’’ ।।७०।।
अथ शुभाशुभशुद्धोपयोगत्रयं कथयति
-മൂര്ഛിത-തന്മയ-രഹേ ഛേ ത്യാം സുധീ ഹേ ജീവ! കോഈ പണ ദേശാന്തരമാം ജാഓ, കോഈ പണ അനുഷ്ഠാന
കരോ തോപണ മോക്ഷ നഥീ.
അഹീം, കാമക്രോധാദി അപധ്യാനഥീ ജീവ ഭോഗോനേ ഭോഗവ്യാ വിനാ പണ ശുദ്ധആത്മഭാവനാഥീ
ച്യുത ഥയോ ഥകോ, (അശുദ്ധ) ഭാവഥീ കര്മോ ബാംധേ ഛേ, തേഥീ നിരംതര ചിത്തശുദ്ധി കരവാ യോഗ്യ ഛേ, ഏവോ
ഭാവാര്ഥ ഛേ. കഹ്യും പണ ഛേ കേ
‘‘कंखिदकलुसिदभूदो हु कर्मभोगेहिं मुच्छिदो जीवो णवि भुंजंतो भोगे
बंधदि भावेण कम्माणि ।।’’ (അര്ഥ:ഭോഗോനീ ആകാംക്ഷാവാളോ അനേ കഷായോഥീ കലുഷിത ഥയോ ഥകോ
കാമഭോഗോഥീ മൂര്ച്ഛിത ജീവ ഭോഗോനേ ന ഭോഗവതോ ഹോവാ ഛതാം പണ മാത്ര അശുദ്ധഭാവഥീ ജ കര്മോ
ബാംധേ ഛേ.) ൭൦.
ഹവേ, ശുഭ, അശുഭ അനേ ശുദ്ധ ഏവാ ത്രണ ഉപയോഗനും കഥന കരേ ഛേ :