Parmatma Prakash (Gujarati Hindi) (Oriya transliteration). Gatha-12 (Adhikar 2) Mokshmarganu Vyakhyan.

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Shri Digambar Jain Swadhyay Mandir Trust, Songadh - 364250
ଶ୍ରୀ ଦିଗଂବର ଜୈନ ସ୍ଵାଧ୍ଯାଯମଂଦିର ଟ୍ରସ୍ଟ, ସୋନଗଢ - ୩୬୪୨୫୦
दंसणु इत्यादि दंसणु केवलदर्शनं णाणु केवलज्ञानं अणंत-सुहु अनन्तसुखम्
एतदुपलक्षणमनन्तवीर्याद्यनन्तगुणाः समउ ण तुट्टइ एतद्गुणकदम्बकमेकसमयमपि यावन्न त्रुटयति
न नश्यति
जासु यस्य मोक्षपर्यायस्याभेदेन तदाधारजीवस्य वा सो पर तदेव केवलज्ञानादिस्वरूपं
सासउ मोक्ख-फ लु शाश्वतं मोक्षफ लं भवति
बिज्जउ अत्थि ण तासु तस्यानन्तज्ञानादि-
मोक्षफ लस्यान्यद् द्वितीयमधिकं किमपि नास्तीति अयमत्र भावार्थः अनन्तज्ञानादिमोक्षफ लं
ज्ञात्वा समस्त रागादित्यागेन तदर्थमेव निरन्तरं शुद्धात्मभावना कर्तव्येति ।।११।। एवं द्वितीय-
महाधिकारे मोक्षफ लकथनरूपेण स्वतन्त्रसूत्रमेकं गतम्
अथानन्तरमेकोनविंशतिसूत्रपर्यन्तं निश्चयव्यवहारमोक्षमार्गव्याख्यानस्थलं कथ्यते तद्यथा
१३८) जीवहँ मोक्खहँ हेउ वरु दंसणु णाणु चरित्तु
ते पुणु तिण्णि वि अप्पु मुणि णिच्छएँ एहउ वुत्तु ।।१२।।
जीवानां मोक्षस्य हेतुः वरं दर्शनं ज्ञानं चारित्रम्
तानि पुनः त्रीण्यपि आत्मानं मन्यस्व निश्चयेन एवं उक्त म् ।।१२।।
दूसरा मोक्षफ ल नहीं है, और इससे अधिक दूसरी वस्तु कोई नहीं है
भावार्थ :मोक्षका फ ल अनंतज्ञानादि जानकर समस्त रागादिकका त्याग करके
उसीके लिये निरंतर शुद्धात्माकी भावना करनी चाहिये ।।११।।
इसप्रकार दूसरे महाधिकारमें मोक्षफ लके कथनकी मुख्यताकर एक दोहासूत्र
कहा
आगे उन्नीस दोहापर्यंत निश्चय और व्यवहार मोक्षमार्गका व्याख्यान करते हैं
गाथा१२
अन्वयार्थ :[जीवानां ] जीवों के [मोक्षस्य हेतुः ] मोक्षके कारण [वरं ] उत्कृष्ट
ଭାଵାର୍ଥ:ମୋକ୍ଷନୁଂ ଅନଂତଜ୍ଞାନାଦିରୂପ ଫଳ ଜାଣୀନେ ସମସ୍ତ ରାଗାଦିନା ତ୍ଯାଗଥୀ ତେନା ଅର୍ଥେ
ଜ ନିରଂତର ଶୁଦ୍ଧାତ୍ମାନୀ ଭାଵନା କରଵୀ ଜୋଈଏ. ୧୧.
ଏ ପ୍ରମାଣେ ବୀଜା ମହାଧିକାରମାଂ ମୋକ୍ଷଫଳନା କଥନରୂପେ ସ୍ଵତଂତ୍ର ଏକ ଦୋହକସୂତ୍ର ସମାପ୍ତ ଥଯୁଂ.
ତ୍ଯାର ପଛୀ ଓଗଣୀସ ସୂତ୍ରୋ ସୁଧୀ ନିଶ୍ଚଯଵ୍ଯଵହାରମୋକ୍ଷମାର୍ଗନା ଵ୍ଯାଖ୍ଯାନନୁଂ ସ୍ଥଳ କହେ
ଛେ :ତେ ଆ ପ୍ରମାଣେ :
ଅଧିକାର-୨ : ଦୋହା-୧୨ ]ପରମାତ୍ମପ୍ରକାଶ: [ ୨୧୯