Parmatma Prakash (Gujarati Hindi) (Oriya transliteration). Gatha-11 (Adhikar 2) Mokshanu Phala.

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Shri Digambar Jain Swadhyay Mandir Trust, Songadh - 364250
ଶ୍ରୀ ଦିଗଂବର ଜୈନ ସ୍ଵାଧ୍ଯାଯମଂଦିର ଟ୍ରସ୍ଟ, ସୋନଗଢ - ୩୬୪୨୫୦
केवलज्ञानाद्यनन्तगुणव्यक्ति रूपस्य कार्यसमयसारभूतस्य हि परमात्मलाभो मोक्षो भवतीति स च
केषाम् पुत्रकलत्रममत्वस्वरूपप्रभृतिसमस्तविकल्परहितध्यानेन भावकर्मद्रव्यकर्मकलङ्करहितानां
भव्यानां भवतीति ज्ञानिनः कथयन्ति अत्रायमेव मोक्षः पूर्वोक्त स्यानन्तसुखस्योपादेयभूतस्य
कारणत्वादुपादेय इति भावार्थः ।।१०।। एवं मोक्षमोक्षफ लमोक्षमार्गादिप्रतिपादकद्वितीय-
महाधिकारमध्ये सूत्रदशकेन मोक्षस्वरूपनिरूपणस्थलं समाप्तम्
अथ तस्यैव मोक्षस्यानन्तचतुष्टयस्वरूपं फ लं दर्शयति
१३७) दंसणु णाणु अणंतसुहु समउ ण तुट्टइ जासु
सो पर सासउ मोक्खफ लु बिज्जउ अत्थि ण तासु ।।११।।
दर्शनं ज्ञानं अनन्तसुखं समयं न त्रुटयति यस्य
तत् परं शाश्वतं मोक्षफ लं द्वितीयं अस्ति न तस्य ।।११।।
जिन्होंने भावकर्म और द्रव्यकर्मरूपी कलंक क्षय किये हैं, ऐसे जीवोंके निर्वाण होता है, ऐसा
ज्ञानीजन कहते हैं
यहाँ पर अनंत सुखका कारण होनेसे मोक्ष ही उपादेय है ।।१०।।
इसप्रकार मोक्षका फ ल और मोक्ष - मार्गका जिसमें कथन है, ऐसे दूसरे महाधिकारके
दस दोहोंमें मोक्षका स्वरूप दिखलाया
आगे मोक्षका फ ल अनंतचतुष्टय है, यह दिखलाते हैं
गाथा११
अन्वयार्थ :[यस्य ] जिस मोक्षपर्यायके धारक शुद्धात्माके [दर्शनं ज्ञानं
अनंतसुखं ] केवलदर्शन, केवलज्ञान, अनंतसुख और अनंतवीर्य इन अनंतचतुष्टयोंको आदि
देकर अनंत गुणोंका समूह [समयं न त्रुटयति ] एक समयमात्र भी नाश नहीं होता, अर्थात्
हमेशा अनंत गुण पाये जाते हैं
[तस्य ] उस शुद्धात्माके [तत् ] वही [परं ] निश्चयसे
[शाश्वतं फ लं ] हमेशा रहनेवाला मोक्षका फ ल [अस्ति ] है, [द्वितीयं न ] इसके सिवाय
ଅହୀଂ ଆ ଜ ମୋକ୍ଷ, ପୂର୍ଵୋକ୍ତ ଉପାଦେଯଭୂତ ଅନଂତ ସୁଖନୁଂ କାରଣ ହୋଵାଥୀ ଉପାଦେଯ ଛେ, ଏଵୋ
ଭାଵାର୍ଥ ଛେ. ୧୦.
ଏ ପ୍ରମାଣେ ମୋକ୍ଷ, ମୋକ୍ଷଫଳ ଅନେ ମୋକ୍ଷମାର୍ଗନା ପ୍ରତିପାଦକ ଦ୍ଵିତୀଯ ମହାଧିକାରମାଂ ଦସ ଦୋହକ
ସୂତ୍ରୋଥୀ ମୋକ୍ଷସ୍ଵରୂପନା ନିରୂପଣନୁଂ ସ୍ଥଳ ସମାପ୍ତ ଥଯୁଂ.
ହଵେ, ତେ ମୋକ୍ଷନୁଂ ଫଳ ଅନଂତଚତୁଷ୍ଟସ୍ଵରୂପ ଛେ, ଏମ ଦର୍ଶାଵେ ଛେ :
୨୧୮ ]ଯୋଗୀନ୍ଦୁଦେଵଵିରଚିତ: [ ଅଧିକାର-୨ : ଦୋହା-୧୧