Parmatma Prakash (Gujarati Hindi) (Oriya transliteration). Gatha-22 (Adhikar 2).

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Shri Digambar Jain Swadhyay Mandir Trust, Songadh - 364250
ଶ୍ରୀ ଦିଗଂବର ଜୈନ ସ୍ଵାଧ୍ଯାଯମଂଦିର ଟ୍ରସ୍ଟ, ସୋନଗଢ - ୩୬୪୨୫୦
नयनपुटविघटनजलभाजनहस्तादिव्यापारदिनकरबिम्बगमनादिभिः पुद्गलपर्यायभूतैः क्रियाविशेषैः
समयादिकालपर्यायाः परिच्छिद्यन्ते, ते चाणुव्यतिक्रमणादयः तेषामेव समयादिकालपर्यायाणां
व्यक्ति निमित्तत्वेन बहिरङ्गसहकारिकारणभूता एव ज्ञातव्या न चोपादानकारणभूता घटोत्पत्तौ
कुम्भकारचक्रचीवरादिवत्
तस्माद् ज्ञायते तत्कालद्रव्यममूर्तमविनश्वरमस्तीति तस्य तत्पर्यायाः
समयनिमिषादय इति अत्रेदं तु कालद्रव्यं सर्वप्रकारोपादेयभूतात् शुद्धबुद्धैकस्वभावाज्जीव-
द्रव्याद्भिन्नत्वाद्धेयमिति तात्पर्यार्थः ।।२१।।
अथजीवपुद्गलकालद्रव्याणि मुक्त्वा शेषधर्माधर्माकाशान्येकद्रव्याणीति निरूपयति
१४८) जीउ वि पुग्गलु कालु जिय ए मेल्लेविणु दव्व
इयर अखंड वियाणि तुहुँ अप्प-पएसहिँ सव्व ।।२२।।
होते हैं, वैसे समयादिक मूर्तीक नहीं हैं इसलिये अमूर्तद्रव्य जो काल उसकी पर्याय हैं, द्रव्य
नहीं हैं, कालद्रव्य अणुरूप अमूर्तीक अविनश्वर है, और समयादिक पर्याय अमूर्तीक है, परंतु
विनश्वर हैं, अविनश्वरपना द्रव्यमें ही है, पर्यायमें नहीं है, यह निश्चयसे जानना
इसलिये
समयादिकको कालद्रव्यकी पर्याय ही कहना चाहिये, पुद्गलकी पर्याय नहीं हैं, पुद्गलपर्याय
मूर्तीक है
सर्वथा उपादेय शुद्ध-बुद्ध केवलस्वभाव जो जीव उससे भिन्न कालद्रव्य है, इसलिये
हेय है, यह सारांश हुआ ।।२१।।
आगे जीव, पुद्गल, काल ये तीन द्रव्य अनेक हैं, और धर्म, अधर्म, आकाश ये तीन
द्रव्य एक हैं, ऐसा कहते हैं
ଵଳୀ ପୁଦ୍ଗଲପରମାଣୁନୁଂ ମଂଦଗତିଥୀ ଗମନ, ନଯନପୁଟଵିଘଟନ (ଆଂଖନୋ ପଲକାର),
ଜଳଭାଜନ ତଥା ହସ୍ତାଦିନୋ ଵ୍ଯାପାର, ସୂର୍ଯବିଂବନୁଂ ଗମନ ଵଗେରେ ପୁଦ୍ଗଲପର୍ଯାଯଭୂତ କ୍ରିଯା ଵିଶେଷୋଥୀ
ସମଯାଦି କାଳପର୍ଯାଯୋ ଜଣାଯ ଛେ ତେ ପରମାଣୁନା ଵ୍ଯତିକ୍ରମାଦି କ୍ରିଯାଵିଶେଷୋନେ କାଳନା ତେ ସମଯାଦି
ପର୍ଯାଯୋନୀ ଜ ପ୍ରଗଟତାନା ନିମିତ୍ତପଣେ ମାତ୍ର ବହିରଂଗ ସହକାରୀ କାରଣଭୂତ ଜ ଜାଣଵା, ପଣ ଜେଵୀ
ରୀତେ ଘଡାନୀ ଉତ୍ପତ୍ତିମାଂ କୁଂଭାର, ଚାକଡୋ, ଚୀଵରାଦି ଉପାଦାନକାରଣ ନଥୀ ତେଵୀ ରୀତେ ତେମନେ
ଉପାଦାନକାରଣଭୂତ ନ ଜାଣଵା. ମାଟେ ଜଣାଯ ଛେ କେ ତେ କାଳଦ୍ରଵ୍ଯ ଅମୂର୍ତ ଅନେ ଅଵିନଶ୍ଵର ଛେ. ସମଯ,
ନିମିଷ, ଆଦି କାଳଦ୍ରଵ୍ଯନା ପର୍ଯାଯୋ ଛେ.
ଅହୀଂ, ଆ କାଳଦ୍ରଵ୍ଯ ପଣ ସର୍ଵପ୍ରକାରେ ଉପାଦେଯଭୂତ, ଶୁଦ୍ଧ, ବୁଦ୍ଧ ଜ ଜେନୋ ଏକ ସ୍ଵଭାଵ ଛେ
ଏଵା ଜୀଵଦ୍ରଵ୍ଯଥୀ ଭିନ୍ନ ହୋଵାଥୀ, ହେଯ ଛେ ଏଵୋ ତାତ୍ପର୍ଯାର୍ଥ ଛେ. ୨୧.
ହଵେ ଜୀଵ, ପୁଦ୍ଗଲ ଅନେ କାଳ ଆ ତ୍ରଣ ଦ୍ରଵ୍ଯୋ ସିଵାଯନା ବାକୀନା ଧର୍ମ, ଅଧର୍ମ ଅନେ ଆକାଶ
ଆ ତ୍ରଣ ଦ୍ରଵ୍ଯୋ ଏକ ଏକ ଛେ; ଏମ କହେ ଛେ :
୨୪୦ ]ଯୋଗୀନ୍ଦୁଦେଵଵିରଚିତ: [ ଅଧିକାର-୨ : ଦୋହା-୨୨