Parmatma Prakash (Gujarati Hindi) (Oriya transliteration). Gatha-188 (Adhikar 2).

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Shri Digambar Jain Swadhyay Mandir Trust, Songadh - 364250
ଶ୍ରୀ ଦିଗଂବର ଜୈନ ସ୍ଵାଧ୍ଯାଯମଂଦିର ଟ୍ରସ୍ଟ, ସୋନଗଢ - ୩୬୪୨୫୦
ଅଧିକାର-୨ : ଦୋହା-୧୮୮ ]ପରମାତ୍ମପ୍ରକାଶ: [ ୫୧୫
सुखात्प्रतिपक्षभूतस्य नारकादिदुःखस्य यतः कारणात् तिल-तुस-मित्तु वि सल्लडा
तिलतुषमात्रमपि शल्यं वेयण करइ अवस्स वेदनां बाधां करोत्यवश्यं नियमेन अत्र
चिन्तारहितात्परमात्मनः सकाशाद्विलक्षणा या विषयकषायादिचिन्ता सा न कर्तव्या
काण्डादिशल्यमिव दुःखकारणत्वादिति भावार्थः ।।१८७।।
किंच
३१९) मोक्खु म चिंतहि जोइया मोक्खु ण चिंतिउ होइ
जेण णिबद्धउ जीवडउ मोक्खु करेसइ सोइ ।।१८८।।
मोक्षं मा चिन्तय योगिन् मोक्षो न चिन्तितो भवति
येन निबद्धो जीवः मोक्षं करिष्यति तदेव ।।१८८।।
ଚିଂତା ନ କର, କାରଣ କେ ତଲନା ଫୋତରା ଜେଟଲୁଂ ଶଲ୍ଯ ପଣ ଅଵଶ୍ଯ (ନିଯମଥୀ) ଵେଦନା-ବାଧା-ଉତ୍ପନ୍ନ
କରେ ଛେ.
ଅହୀଂ, ଚିଂତା ରହିତ ପରମାତ୍ମାଥୀ ଵିଲକ୍ଷଣ ଜେ ଵିଷଯକଷାଯାଦିନୀ ଚିଂତା ଛେ ତେ ନ କରଵୀ,
କାରଣ କେ ଜେମ ବାଣାଦି ଶଲ୍ଯ ଦୁଃଖନୁଂ କାରଣ ଛେ ତେଵୀ ରୀତେ ଚିଂତା ଦୁଃଖନୁଂ କାରଣ ଛେ, ଏ ଭାଵାର୍ଥ
ଛେ. ୧୮୭.
ହଵେ, ମୋକ୍ଷନୀ ପଣ ଚିଂତା ନ କରଵୀ ତେମ କହେ ଛେ :
तृणप्रमाण भी सलाई महा दुःखका कारण है, जब वह शल्य निकाले, तभी सुख होता
है
।।१८७।।
आगे मोक्षकी भी चिन्ता नहीं करना, ऐसा कहते हैं
गाथा१८८
अन्वयार्थ :[योगिन् ] हे योगी, अन्य चिन्ताकी तो बात क्या रही, [मोक्षं मा
चिंतय ] मोक्षकी भी चिन्ता मत कर, [मोक्षः ] क्योंकि मोक्ष [चिंतितो न भवति ] चिन्ता
करनेसे नहीं होता, वाँछाके त्यागसे ही होता है, रागादि चिन्ताजालसे रहित केवलज्ञानादि
अनंतगुणोंको प्रगटता सहित जो मोक्ष है, वह चिंताके त्यागसे होता है
यही कहते हैं[येन ]
जिन मिथ्यात्वरागादि चिन्ताजालोंसे उपार्जन किये कर्मोंसे [जीवः ] यह जीव [निबद्धः ]
बँधा हुआ है, [तदेव ] वे कर्म ही (क र्मक्षय) [मोक्षं ] शुभाशुभ विकल्पके समूहसे रहित जो
शुद्धात्मतत्त्वका स्वरूप उसमें लीन हुए परमयोगियोंकी मोक्ष [करिष्यति ] करेंगे