Parmatma Prakash (Gujarati Hindi) (Oriya transliteration). Gatha-191 (Adhikar 2).

< Previous Page   Next Page >


Page 519 of 565
PDF/HTML Page 533 of 579

background image
Shri Digambar Jain Swadhyay Mandir Trust, Songadh - 364250
ଶ୍ରୀ ଦିଗଂବର ଜୈନ ସ୍ଵାଧ୍ଯାଯମଂଦିର ଟ୍ରସ୍ଟ, ସୋନଗଢ - ୩୬୪୨୫୦
ଅଧିକାର-୨ : ଦୋହା-୧୯୦ ]ପରମାତ୍ମପ୍ରକାଶ: [ ୫୧୯
कर्तारः मुणि परमाराध्यध्यानरतास्तपोधनाः कान् मुञ्चन्ति सुहासुह-भावडा शुभाशुभ-
मनोवचनकाय व्यापार रहितान् शुद्धात्मद्रव्याद्विपरीतान् शुभाशुभभावान् परिणामान् कति-
संख्योपेतान् सयल वि समस्तानपि अयं भावार्थः समस्तपरद्रव्याशारहितात् स्वशुद्धात्मस्व-
भावाद्विपरीता या आशापीहलोकपरलोकाशा यावत्तिष्ठति मनसि तावद् दुःखी जीव इति ज्ञात्वा
सर्वपरद्रव्याशारहितशुद्धात्मद्रव्यभावना कर्तव्येति
तथा चोक्त म्‘‘आसापिसायगहिओ जीवो
पावेइ दारुणं दुक्खं आसा जाहं णियत्ता ताहं णियत्ताइं सयलदुक्खाइं ।।’’ ।।१९०।।
अथ
३२२) घोरु करंतु वि तव-चरणु सयल वि सत्थ मुणंतु
परम-समाहि-विवज्जयउ णवि देक्खइ सिउ संतु ।।१९१।।
ଆରାଧ୍ଯଧ୍ଯାନରତ ତପୋଧନୋ ସମସ୍ତ ଶୁଭାଶୁଭ ମନଵଚନକାଯଵ୍ଯାପାରଥୀ ରହିତ ଏଵା
ଶୁଦ୍ଧଆତ୍ମଦ୍ରଵ୍ଯଥୀ ଵିପରୀତ ଶୁଭାଶୁଭ ପରିଣାମୋନେ ଛୋଡେ ଛେ.
ଭାଵାର୍ଥ ଏମ ଛେ କେ ସମସ୍ତପରଦ୍ରଵ୍ଯନୀ ଆଶାଥୀ ରହିତ ଏଵା ସ୍ଵଶୁଦ୍ଧ ଆତ୍ମସ୍ଵଭାଵଥୀ
ଵିପରୀତ ଜେ ଆ ଲୋକ ଅନେ ପରଲୋକନୀ ଆଶା ଜ୍ଯାଂ ସୁଧୀ ମନମାଂ ରହେ ଛେ ତ୍ଯାଂ ସୁଧୀ ଜୀଵ ଦୁଃଖୀ
ଛେ, ଏମ ଜାଣୀନେ ସର୍ଵପରଦ୍ରଵ୍ଯନୀ ଆଶା ରହିତ ଏଵା ଶୁଦ୍ଧ ଆତ୍ମଦ୍ରଵ୍ଯନୀ ଭାଵନା କରଵୀ ଜୋଈଏ.
ଵଳୀ କହ୍ଯୁଂ ଛେ କେ
‘‘आसापिसायगहिओ जीवो पावेइ दारुणं दुक्खं
आसा जाहं णियत्ता ताहं णियत्ताई सयलदुक्खाइं ।।’’
(ଅର୍ଥ:ଆଶାରୂପୀ ପିଶାଚଥୀ ଗ୍ରହାଯେଲୋ ଜୀଵ ଦାରୁଣ ଦୁଃଖ ପାମେ ଛେ. ଜେମଣେ ଆଶା
ଛୋଡୀ ତେଓ ସର୍ଵ ଦୁଃଖୋଥୀ ମୁକ୍ତ ଥଯା ଛେ.) ।।୧୯୦.
ଵଳୀ (ହଵେ ଏମ କହେ ଛେ କେ ପରମସମାଧି ଵିନା ଶୁଦ୍ଧ ଆତ୍ମା ଦେଖୀ ଶକାତୋ ନଥୀ) :
विपरीत जो इस लोक परलोककी आशा, वह जब तक मनमें स्थित है, तबतक यह जीव दुःखी
है
ऐसा जानकर सब परद्रव्यकी आशासे रहित जो शुद्धात्मद्रव्य उसकी भावना करनी चाहिये
ऐसा ही कथन अन्य जगह भी हैआशारूप पिशाचसे घिरा हुआ यह जीव महान् भयंकर
दुःख पाता है, जिन मुनियोंने आशा छोड़ी, उन्होंने सब दुःख दूर किये, क्योंकि दुःखका मूल
आशा ही है
।।१९०।।
आगे ऐसा कहते हैं, कि जो परमसमाधिके रहित है, वह शुद्ध आत्माको नहीं देख
सकता