Parmatma Prakash (Gujarati Hindi) (Oriya transliteration).

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Shri Digambar Jain Swadhyay Mandir Trust, Songadh - 364250
ଶ୍ରୀ ଦିଗଂବର ଜୈନ ସ୍ଵାଧ୍ଯାଯମଂଦିର ଟ୍ରସ୍ଟ, ସୋନଗଢ - ୩୬୪୨୫୦
ଅଧିକାର-୨ : ଦୋହା-୧୯୭ ]ପରମାତ୍ମପ୍ରକାଶ: [ ୫୨୯
जो इत्यादि जाे यः जिणु अनेकभवगहनव्यसनप्रापणहेतून् कर्मारातीन् जयतीति
जिनः कथंभूतः केवल-णाणमउ केवलज्ञानाविनाभूतानन्तगुणमयः पुनरपि कथंभूतः
परमाणंद-सहाउ इन्द्रियविषयातीतः स्वात्मोत्थः रागादिविकल्परहितः परमानन्दस्वभावः सो
परमप्पउ स पूर्वोक्त ोऽर्हन्नेव परमात्मा परम-परु प्रकृष्टानन्तज्ञानादिगुणरूपा मा लक्ष्मीर्यस्य
स भवति परमः संसारिभ्यः पर उत्कृष्टः इत्युच्यते परमश्चासौ परश्च परमपरः
साे स
पूर्वोक्त ो वीतरागः सर्वज्ञः
जिय हे जीव अप्प-सहाउ आत्मस्वभाव इति
अत्र योऽसौ
पूर्वोक्त भणितो भगवान् स एव संसारावस्थायां निश्चयनयेन शक्ति रूपेण जिन इत्युच्यते
केवलज्ञानावस्थायां व्यक्ति रूपेण च तथैव च परमब्रह्मादिशब्दवाच्यः स एव तदग्रे स्वयमेव
कथयति निश्चयनयेन सर्वे जीवा जिनस्वरूपाः जिनोऽपि सर्वजीवस्वरूप इति भावार्थः
ଭାଵାର୍ଥ :ଜେ ଭଵଵନମାଂ ଅନେକ ଦୁଃଖୋନୀ ପ୍ରାପ୍ତିନା ହେତୁଭୂତ କର୍ମରୂପୀ ଶତ୍ରୁନେ ଜୀତେ ଛେ
ତେ ଜିନ ଛେ. ତେ ଜିନ କେଵଳଜ୍ଞାନନୀ ସାଥେ ଅଵିନାଭାଵୀ ଅନଂତଗୁଣମଯ ଛେ. ଇନ୍ଦ୍ରିଯନା ଵିଷଯୋଥୀ
ରହିତ, ସ୍ଵ-ଆତ୍ମାଥୀ ଉତ୍ପନ୍ନ, ରାଗାଦି ଵିକଲ୍ପ ରହିତ, ପରମାନଂଦ ସ୍ଵଭାଵୀ ଛେ, ତେ ପୂର୍ଵୋକ୍ତ
ଅର୍ହଂତ ଜ ପରମାତ୍ମା ଛେ, ପରମେଶ୍ଵର ଛେ. ପରମ-ଉତ୍କୃଷ୍ଟ ଅନଂତଜ୍ଞାନାଦି ଗୁଣରୂପ ମା ଅର୍ଥାତ୍ ଲକ୍ଷ୍ମୀ
ଜେନେ ଛେ ତେ ପରମ ଛେ, ସଂସାରୀଓଥୀ ପର ଏଟଲେ ଉତ୍କୃଷ୍ଟ ଛେ. ଆଵା ଜେ ପରମ ପର ତେ ପରମ
ଛେ, ତେ-ପୂର୍ଵୋକ୍ତ ଵୀତରାଗ ସର୍ଵଜ୍ଞ ଛେ. ହେ ଜୀଵ! ତେ ଆତ୍ମସ୍ଵଭାଵ ଛେ.
ଅହୀଂ, ପୂର୍ଵୋକ୍ତ କଥିତ ଭଗଵାନ ତେ ଜ ସଂସାର-ଅଵସ୍ଥାମାଂ ନିଶ୍ଚଯନଯଥୀ ଶକ୍ତିରୂପେ ‘ଜିନ’
କହେଵାଯ ଅନେ କେଵଳଜ୍ଞାନ-ଅଵସ୍ଥାମାଂ ଵ୍ଯକ୍ତିରୂପେ ‘ଜିନ’ ଛେ. ତେ ଜ ପ୍ରମାଣେ ପରମ-ବ୍ରହ୍ମାଦି ଶବ୍ଦଥୀ ଵାଚ୍ଯ
ଏଵା ତେନେ ଜ ଆଗଳ ସ୍ଵଯମେଵ କଥନ କରଶେ.
ନିଶ୍ଚଯନଯଥୀ ସର୍ଵଜୀଵୋ ଜିନସ୍ଵରୂପ ଛେ, ଜିନେଶ୍ଵର ସର୍ଵଜୀଵ
अनंत ज्ञानादि गुणरूप लक्ष्मीवाला आत्मा परमात्मा है उसीको वीतराग सर्वज्ञ कहते हैं,
[जीव ] हे जीव, वही [परमपरः ] संसारियोंसे उत्कृष्ट है, ऐसा जो भगवान् वह तो व्यक्तिरूप
है, और [स आत्मस्वभावः ] वह आत्माका ही स्वभाव है
भावार्थ :संसार अवस्थामें निश्चयनयकर शक्तिरूप विराजमान है, इसलिये
संसारीको शक्तिरूप जिन कहते हैं, और केवलीको व्यक्तिरूप कहते हैं द्रव्यार्थिकनयकर जैसे
भगवान् हैं, वैसे ही सब जीव हैं, इस तरह निश्चयनयकर जीवको परब्रह्म कहो, परमशिव कहो,
जितने भगवान्के नाम हैं, उतने ही निश्चयनयकर विचारो तो सब जीवोंके हैं, सभी जीव
जिनसमान हैं, और जिनराज भी जीवोंके समान हैं, ऐसा जानना
ऐसा दूसरी जगह भी कहा
है जो सम्यग्दृष्टि जीवोंको जिनवर जाने, और जिनेश्वरको जीव जाने, जो जीवोंकी जाति है,
वही जिनवरकी जाति है, और जो जिनवरकी जाति है, वही जीवोंकी जाति है, ऐसे महामुनि