Parmatma Prakash (Gujarati Hindi) (Oriya transliteration).

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Shri Digambar Jain Swadhyay Mandir Trust, Songadh - 364250
ଶ୍ରୀ ଦିଗଂବର ଜୈନ ସ୍ଵାଧ୍ଯାଯମଂଦିର ଟ୍ରସ୍ଟ, ସୋନଗଢ - ୩୬୪୨୫୦
[पाण्डवरामैः नरवरैः पूजितं भक्ति भरेण
श्रीशासनं जिनभाषितं नन्दतु सुखशतैः ।।।।]
।। इति श्रीब्रह्मदेवविरचिता परमात्मप्रकाशवृत्तिः समाप्ता ।।
❀ ❀ ❀
हैंयुधिष्ठिर राजाको आदि लेकर पाँच भाई पांडव और श्रीरामचंद्र तथा अन्य भी विवेकी राजा
हैं, उनसे अत्यन्त भक्तिकर यह जिनशासन पूजनीक है, जिसको सुर नाग भी पूजते हैं, ऐसा
श्रीजिनभाषित शासन सैंकड़ों सुखोंके वृद्धिको प्राप्त होवे
यह परमात्मप्रकाश ग्रंथका व्याख्यान
प्रभाकरभट्टके सम्बोधनके लिये श्रीयोगीन्द्रदेवने किया, उस पर श्रीब्रह्मदेवने संस्कृतटीका की
श्रीयोगीन्द्रदेवने प्रभाकरभट्टको समझानेके लिये तीनसौ पैंतालीस दोहे रचे, उसपर श्रीब्रह्मदेवने
संस्कृतटीका पाँच हजार चार ५००४ प्रमाण की
और उस पर दौलतरामने भाषावचनिकाके
श्लोक अड़सठिसौ नब्बै ६८९० संख्याप्रमाण बनाये
इस प्रकार श्री योगींद्राचार्यविरचित परमात्मप्रकाशकी पं० दौलतरामकृत भाषाटीका
समाप्त हुई
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पांडवरामैः नरवरैः पूजितं भक्ति भरेण
श्री शासनं जिनभाषितं नन्दतु सुखशतैः ।।
ଏ ପ୍ରମାଣେ ଶ୍ରୀ ବ୍ରହ୍ମଦେଵଵିରଚିତ ପରମାତ୍ମପ୍ରକାଶନୀ ଵୃତ୍ତି ସମାପ୍ତ ଥଈ.
ଅର୍ଥ:ଶ୍ରୀ ରାମଚଂଦ୍ର, ପାଂଚ ପାଂଡଵୋ ଅନେ ଅନ୍ଯ ନରଵରୋଥୀ ଆ ଜିନଶାସନ ଅତ୍ଯଂତ
ଭକ୍ତିଥୀ ପୂଜିତ ଛେ ଏଵୁଂ ଶ୍ରୀଜିନଭାଷିତ ଶାସନ ସେଂକଡୋ ସୁଖୋଥୀ ସମୃଦ୍ଧ ଵର୍ତୋ.
(ଆ ପରମାତ୍ମପ୍ରକାଶ ଗ୍ରଂଥନୁଂ ଵ୍ଯାଖ୍ଯାନ ପ୍ରଭାକରଭଟ୍ଟନା ସଂବୋଧନ ମାଟେ ଶ୍ରୀଯୋଗୀନ୍ଦ୍ରଦେଵେ କର୍ଯୁଂ.
ତେନା ପର ଶ୍ରୀବ୍ରହ୍ମଦେଵେ ସଂସ୍କୃତ ଟୀକା କରୀ. ଶ୍ରୀଯୋଗୀନ୍ଦ୍ରଦେଵେ ପ୍ରଭାକରଭଟ୍ଟନେ ସମଜାଵଵା ମାଟେ ୩୪୫ ଦୋହା
ରଚ୍ଯା, ତେନା ପର ଶ୍ରୀ ବ୍ରହ୍ମଦେଵେ ସଂସ୍କୃତଟୀକା ୫୦୦୪ ଶ୍ଲୋକ ପ୍ରମାଣନୀ କରୀ.)
ଆ ପ୍ରକାରେ ଶ୍ରୀ ଯୋଗୀନ୍ଦ୍ରାଚାର୍ଯ ଵିରଚିତ ପରମାତ୍ମପ୍ରକାଶନୀ ଶ୍ରୀମଦ୍ ବ୍ରହ୍ମଦେଵ ଵିରଚିତ
ସଂସ୍କୃତ ଟୀକାନୋ ଗୁଜରାତୀ ଅନୁଵାଦ ସମାପ୍ତ ଥଯୋ.
LL
ଟୀକାକାରନୁଂ ଅଂତିମ କଥନ ]ପରମାତ୍ମପ୍ରକାଶ: [ ୫୫୫