Parmatma Prakash (Gujarati Hindi) (Tamil transliteration). Gatha-93 (Adhikar 1) Bhedagyanani Mukhyatathi Aatmanu Kathan.

< Previous Page   Next Page >


Page 152 of 565
PDF/HTML Page 166 of 579

background image
Shri Digambar Jain Swadhyay Mandir Trust, Songadh - 364250
ஶ்ரீ திகஂபர ஜைந ஸ்வாத்யாயமஂதிர ட்ரஸ்ட, ஸோநகட - ௩௬௪௨௫௦
௧௫௨ ]யோகீந்துதேவவிரசித: [ அதிகார-௧ : தோஹா-௯௩
सम्यग्द्रष्टिभावनास्थितेन सूत्राष्टकं समाप्तम् ।।
अथानन्तरं सामान्यभेदभावनामुख्यत्वेन ‘अप्पा संजमु’ इत्यादि प्रक्षेपकान्
विहायैकत्रिंशत्सूत्रपर्यन्तमुपसंहाररूपा चूलिका कथ्यते तद्यथा
यदि पुण्यपापादिरूपः परमात्मा न भवति तर्हि कीद्रशो भवतीति प्रश्ने प्रत्युत्तरमाह
९३) अप्पा संजमु सीलु तउ अप्पा दंसणु णाणु
अप्पा सासय-मोक्ख-पउ जाणंतउ अप्पाणु ।।९३।।
आत्मा संयमः शीलं तपः आत्मा दर्शनं ज्ञानम्
आत्मा शाश्वतमोक्षपदं जानन् आत्मानम् ।।९३।।
अधिकारमें मिथ्यादृष्टिकी भावनासे रहित जो सम्यग्दृष्टिकी भावना उसकी मुख्यतासे आठ दोहा-
सूत्र कहे
आगे भेदविज्ञानकी मुख्यतासे ‘‘अप्पा संजमु’’ इत्यादि इकतीस दोहापर्यन्त क्षेपक-
सूत्रोंको छोड़कर पहला अधिकार पूर्ण करते हुए व्याख्यान करते हैं, उसमें भी जो शिष्यने प्रश्न
किया कि यदि पुण्य-पापादिरूप आत्मा नहीं है, तो कैसा है ? ऐसे प्रश्नका श्रीगुरु समाधान
करते हैं
गाथा९३
अन्वयार्थ :[आत्मा ] निज गुण-पर्यायका धारक ज्ञानस्वरूप चिदानंद ही [संयमः ]
संयम है, [शीलं तपः ] शील है, तप है, [आत्मा ] आत्मा [दर्शनं ज्ञानम् ] दर्शनज्ञान है, और
[आत्मानम् जानन् ] अपनेको जानता अनुभवता हुआ [आत्मा ] आत्मा [शाश्वतमोक्षपदं ]
अविनाशी सुखका स्थान मोक्षका मार्ग है
इस कथनको विशेषतर कहते हैं
விபரீத ஸம்யக்த்ரஷ்டிநீ பாவநாநீ முக்யதாதீ ஆட காதாஸூத்ரோ ஸமாப்த தயாஂ.
த்யார பசீ ஹவே ஸாமாந்ய பேதபாவநாநீ முக்யதாதீ ‘अप्पा संजमु’ இத்யாதி ப்ரக்ஷேபகோநே
சோடீநே ஏகத்ரீஸ ஸூத்ரோ ஸுதீ (பஹேலோ அதிகார பூர்ண கரதாஂ) உபஸஂஹாரரூபே சூலிகா கஹே சே. தே
ஆ ப்ரமாணே :
ஜோ புண்ய பாபாதிரூப பரமாத்மா நதீ தோ தே கேவோ சே?
ஏவா ப்ரஶ்நநா உத்தரரூபே ஶ்ரீகுரு ஸமாதாந கரே சே :