Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

< Previous Page   Next Page >


PDF/HTML Page 1000 of 4199

 

२२८ ] [ प्रवचन रत्नाकर भाग-४

थई जाय छे. पण ए तो निमित्तनुं कथन छे. चार गुण चिकाशवाळो छ गुण चिकाशरूपे परिणमे ते पोताथी स्वतंत्र परिणमे छे. छूटो परमाणु जे सूक्ष्म परिणम्यो छे ते स्थूळ स्कंधमां भळे त्यां स्थूळ थई जाय छे ते पोताना कारणे स्थूळ थाय छे, संयोगने लीधे स्थूळ थाय छे एम छे ज नहि. अहाहा..! बे द्रव्यनी क्रिया एक द्रव्य करे एम मानवुं ए जिनमत नथी. आवी वात छे. ल्यो, ८प गाथा पूरी थई.

[प्रवचन नं. १४४ शेष, १४प, १४६, १४७ चालु * दिनांक २-८-७६ थी प-८-७६]