Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration). KartaKarma Adhikar 2 Gatha: 90.

< Previous Page   Next Page >


PDF/HTML Page 1062 of 4199

 

परमात्मने नमः।
श्रीमद्भगवत्कुंदकुंदाचार्यदेवप्रणीत
श्री
समयसार
उपर
परम पूज्य सद्गुरुदेव श्री कानजीस्वामीनां प्रवचनो
श्रीमदमृतचन्द्रसूरिकृता आत्मख्यातिः।

कर्ताकर्म अधिकार

अथात्मनस्त्रिविधपरिणामविकारस्य कर्तृत्वं दर्शयति–

एदेसु य उवओगो तिविहो सुद्धो णिरंजणो भावो।
जं सो करेदि भावं उवओगो तस्स सो कत्ता।। ९० ।।
एतेषु चोपयोगस्त्रिविधः शुद्धो निरञ्जनो भावः।
यं स करोति भावमुपयोगस्तस्य स कर्ता।। ९० ।।

हवे आत्माने त्रण प्रकारना परिणामविकारनुं कर्तापणुं दर्शावे छेः-

एनाथी छे उपयोग त्रणविध, शुद्ध निर्मळ भाव जे;
जे भाव कंई पण ते करे, ते भावनो कर्ता बने. ९०.

गाथार्थः– [एतेषु च] अनादिथी आ त्रण प्रकारना परिणामविकारो होवाथी,

[उपयोगः] आत्मानो उपयोग- [शुद्धः] जोके (शुद्धनयथी) ते शुद्ध, [निरञ्जनः]