Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

< Previous Page   Next Page >


PDF/HTML Page 212 of 4199

 

भाग-१ ] २०प

ए बन्ने भूतार्थ छे. आगळ कह्युं के भूतार्थ एक छे. अहीं कहे छे बन्ने भूतार्थ छे. द्रव्य अने पर्यायनो पर्यायथी अनुभव करतां बंने भूतार्थ छे. बे छे ए रीते बेनुं ज्ञान करावे छे. ते बेनी अपेक्षाए बेपणानुं ज्ञान अने बेपणुं सत् छे एटलुं. ए आश्रय करवा लायक छे एम नहीं.

११ मी गाथामां एम कह्युं के-भूतार्थ छे ते शुद्धनय छे अने पर्याय छे ते अभूतार्थ छे. पर्याय जे असत्य छे ते कोई काळे सत्य थाय नहीं. पण पर्याय पर्याय तरीके सत्य छे, त्रिकाळनी अपेक्षाथी असत्य छे. एक अपेक्षाथी त्रिकाळ आत्माने भूतार्थ कहे अने वळी एक अपेक्षाथी द्रव्य अने पर्याय बेयने भेदथी, क्रमथी जाणवुं ए भूतार्थ छे एम कहे, त्यां अपेक्षा बराबर समजवी जोइए द्रव्यने मुख्य करी द्रव्यने जाणवामां आवे त्यां पर्याय गौण छे, अने पर्यायने मुख्य करी पर्यायनुं ज्ञान करवामां आवे त्यारे द्रव्य गौण छे. आ तो बे नयपक्ष छे, भेदरूप विकल्पो छे. ए छे ए अपेक्षाए बन्ने भूतार्थ छे. आश्रय करवा लायक भूतार्थ ए वात अहीं नथी. अहीं तो द्रव्यार्थिक अने पर्यायार्थिक एवा बे नयो छे, ए ‘छे’ ए अपेक्षाए बन्नेने भूतार्थ कह्या. जेना आश्रये सम्यग्दर्शन थाय ए भूतार्थ ते आ नहीं. अहो! दिगंबर संतोए गजब काम कर्यां छे.

हवे कहे छे-द्रव्य अने पर्याय ए बन्नेथी नहि आलिंगन करायेला-एटले के द्रव्यार्थिकनये द्रव्यने मुख्य करी जाणवुं तथा पर्यायार्थिकनये पर्यायने मुख्य करी जाणवुं- एवा बन्ने भेदपक्षथी नहि स्पर्शायेला अथवा बन्ने प्रकारना विकल्पोथी रहित एवा शुद्धवस्तुमात्र त्रिकाळी एकरूप शुद्ध चैतन्यभावनो अनुभव करतां तेओ अभूतार्थ छे, ते बन्ने नयना भेदो असत्यार्थ छे, जूठा छे.

घडीकमां साचा अने घडीकमां खोटा? भाई जे अपेक्षा होय ते बराबर समजवी जोईए. व्यवहार व्यवहारनी अपेक्षाए नथी? पर्याय पर्यायपणे नथी? पर्याय नथी तो द्रव्य एकलुं रही जाय. तो एकांत थई जाय. पर्याय पर्यायपणे छे. ते शुद्धजीववस्तुमां नथी. एवा शुद्धजीववस्तुनो अनुभव थाय छे तो पर्यायमां. पर्याय वस्तुथी भिन्न रही आखी वस्तुने जाणी ले छे. पर्याय द्रव्यमां-शुद्धजीववस्तुमां नथी, पण पर्यायमां आखुं द्रव्य जणाई जाय छे.

द्रव्य जे वस्तुमात्र अखंड छे ए त्रिकाळी सत् छे. पण ए सत्ने जाणनारी पर्याय छे ने? वेदांत एम कहे छे आत्मा ‘कूटस्थ’ छे. तो ए कूटस्थने जाण्युं कोणे? कूटस्थ कूटस्थने जाणे? अहीं आत्मा छे ध्रुव कूटस्थ. ध्रुव ए कूटस्थ छे. पण जाण्युं कोणे? तो पर्याये. अनित्य पर्याय ते नित्यने जाणे छे, अने ते पर्याय द्रव्यने अडया विना नित्यने जाणे