Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

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२७० [ समयसार प्रवचन
प्रवाह एवो छे के कोई चीज पडे तो बहार काढे. गुफामां बहु ज अंधारुं होय छे.
चक्रवर्ती पासे एक मणिरत्न होय छे. एने घसवाथी सूर्य जेवो प्रकाश थाय छे. आ
प्रकाशमां आखुं लश्कर त्यांथी पसार थई जाय छे. एम अहीं कहे छे के अमोने जे
चैतन्यमणिरत्न छे तेमां एकाग्रतारूप घसारो करवाथी पर्याये पर्याये ज्ञानप्रकाश प्रगट
थाय छे. ए प्रकाशमां अमे मोक्षमार्गमां चाल्या जईए छीए. आचार्यदेव निज
चैतन्यचिंतामणिरत्नमां एकाग्रताथी प्राप्त ज्ञानप्रकाशनी ज भावना करे छे, बीजुं कांई
ईच्छता नथी.
हवे कहे छे के जेवी रीते ‘उल्लसत् लवण–खिल्य लिलायितम्’ मीठानी
कांकरी एक क्षाररसनी लीलानुं आलंबन करे छे अर्थात् एकला क्षाररसना स्वभावथी
भरेली छे, तेवी रीते
‘यदेकरसम् आलम्बते’ अमारो आ आत्मा एकला ज्ञानरसथी
पूर्ण भरेलो छे. वळी ‘अखण्डितम्’ ते तेज अखंडित छे एटले रागादि ज्ञेयोना
आकारे खंडित थतुं नथी तथा ‘अनाकुलम्’ अनाकुळ छे. एमां कर्मोना निमित्तथी
उत्पन्न थता रागादिजनित आकुळता नथी. ए त्रिकाळ, अखंड, ज्ञानरूप अने अनाकुळ
आनंदस्वरूप छे.
‘ज्वलदनन्तम् अंतर्बहिः वळी ते अविनाशीपणे अंतरंगमां अने
बहारमां प्रगट देदीप्यमान छे. अंतरंग शक्तिमां ज्ञाननुं चैतन्यनुं-तेज परिपूर्ण भरेलुं
छे अने तेमां एकाग्र थतां पर्यायमां पण ज्ञानतेज प्रगट थाय छे.
सहजं ते
स्वभावथी थयुं छे. आत्माना ज्ञानस्वरूपने कोईए उपजाव्युं, रच्युं के बनाव्युं छे एम
नथी, सहज ज छे.
उद्विलासम् सदा अने हमेशां एनो विलास उदयरूप छे.
ज्ञानप्रकाश सदाय उदयरूप रहे छे. वस्तु सदाय उदयरूप छे अने जे ज्ञानप्रकाशनो
पर्यायमां उदय थाय ते पण सदाय रहे छे. त्रिकाळी चीज एकरूप प्रतिभासमान छे.
तेना आश्रये पर्यायमां अनेकतानो नाश थई एकरूपनो अनुभव थाय छे.
* कळश १४ः भावार्थ उपरनुं प्रवचन *
आचार्य भगवाने प्रार्थना करी छे के आ ज्ञानानंदमय एकाकारस्वरूप ज्योति
अमोने सदा प्राप्त रहो. भगवान आत्मा स्वरूपथी ज ज्ञानानंदमय छे, अभेद
एकाकारस्वरूप छे. अखंड अनाकुळस्वरूप भगवान आत्मानो आश्रय लईने जे
अनुभवनी दशा प्रगट थाय ए-जेम वस्तु अविनाशी छे तेम-अविनाशी छे. एनो
पण (एक अपेक्षाए) नाश थतो नथी. अष्टपाहुडना चारित्रपाहुडनी चोथी गाथामां
सम्यग्दर्शन -ज्ञानचारित्रना परिणामने पण ‘अक्षय-अमेय’ कह्या छे. वस्तु जेवी
अक्षय-अमेय छे तेवी आ पर्याय पण अक्षय-अमेय छे. भाई! अध्यात्म सूक्ष्म छे.
एनो एकेक शब्द मंत्र छे. जेम कोईने