गाथा २३-२४-२प ] [ ९९ छे तो मिथ्यात्वनो नाश करी सम्यग्दर्शननी प्राप्ति थवी तो सुगम छे.’ अहाहा! जयचंद पंडिते केवो सरस अर्थ कर्यो छे! बे घडी (४८ मिनिट)नी अंदरना ध्यानमां केवळज्ञान पामी जाय छे, त्रणकाळ त्रणलोकने जाणनार केवळज्ञानी परमात्मा थई जाय छे. पांडवो मुनिदशामां शेत्रुंजय उपर अंतरना ध्यानमां हता. त्यारे दुर्योधनना भाणेजे पूर्वना वेरना कारणे गरम धगधगता लोढाना दागीना तेमने पहेराव्या. आ परिषहथी डग्या नहि अने आत्मामां स्थिरता करी. तो बे घडीमां केवळज्ञान पामी त्रण पांडवो मोक्षे पधार्या. “सादि अनंत अनंत समाधि सुखमां” पूर्वे नहि थयेली अभूतपूर्व सिद्धदशाने पाम्या. तो मिथ्यात्वनो नाश करी सम्यग्दर्शननी प्राप्ति थवी तो सुगम छे. माटे श्री गुरुओए ए ज उपदेश प्रधानताथी कर्यो छे. मुख्यताथी आ ज उपदेश कर्यो छे.