Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

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१८२ ] [ प्रवचन रत्नाकर भाग-३ भेद छे ए एनी पर्यायमां छे तथापि ते आत्मभूत नथी, आत्मा नथी. जे भावो-रंग-राग अने गुणस्थान आदि भेदना भावो-नीकळी जाय छे ते आत्मा केम होय? पुद्गलना संगे थता ए बधाय भावो पुद्गलना ज छे. झीणी वात, भाई! वीतरागनो मार्ग बहु झीणो छे.

लोको तो भगवाननी भक्ति-पूजा करे, बहारथी व्रतादि पाळे अने जीवोनी दया पाळे एने धर्मी माने छे. पण बापु! धर्म जुदी चीज छे. धर्म तो वीतरागभाव छे. रागादि ए कोई वीतरागनो मार्ग नथी. भाई! परनी दया तो कोई पाळी शक्तुं ज नथी. छतां हुं परनी दया पाळुं छुं एवी मान्यता ए मिथ्यात्व छे. तथा जे दयानो शुभभाव आव्यो ते जीवनो स्वभाव नथी पण ते पुद्गलथी रचायेलो भाव छे एम अहीं कहे छे. ए दयानो जे भाव छे ते राग छे अने राग छे ते निश्चयथी हिंसा छे. शुभभाव ए साची दया नथी, भाई!

प्रश्नः– तो साची दया शुं छे?

उत्तरः– भाई! शुद्ध चैतन्यमय त्रिकाळी ध्रुवस्वरूप भगवान आत्माना लक्षे जे शान्ति अने वीतरागताना निर्मळ परिणाम उत्पन्न थाय अने त्यारे रागनी उत्पत्ति ज न थाय तेने परमात्मा साची दया अने अहिंसा कहे छे. पुरुषार्थ सिद्ध्युपाय (श्लोक ४४)मां आचार्य अमृतचंद्रस्वामीए एम कह्युं छे के-जे राग उत्पन्न थाय छे ते, चाहे तो देव-गुरु-शास्त्रनी भक्तिनो हो के व्रतादिना पालननो हो, हिंसा छे. तथा अहीं तेने पुद्गलनुं कार्य कह्युं छे. अहाहा! ए रागादि भावो आनंदघनस्वरूप चैतन्यना नाथ भगवान आत्मानुं कार्य नथी, पण ए पुद्गलनी ज रचना छे एम हे जीवो! तमे जाणो.

आनंदघनस्वरूप भगवान आत्मा छे तो एनुं कार्य आनंद आवे ते छे. वीतराग- स्वरूप प्रभु आत्मा छे तो तेनुं कार्य वीतरागता आवे ए छे. परंतु दया, दान, व्रत, भक्तिना विकल्प-राग ऊठे ए आत्मानुं कार्य नथी. ए तो पुद्गलनुं कार्य छे. जेवुं कारण होय एवुं ज कार्य थाय एम अहीं सिद्ध करवुं छे. हवे पछी र्क्ता-कर्म अधिकार लेवो छे तेथी तेना उपोद्घातरूपे अहींथी शरू करे छे के कारण अने कार्य बन्ने अभिन्न होय छे. अहाहा! शुं शैली छे! पुद्गल करण छे अने भेद-रागादि तेनुं (पुद्गलनुं) कार्य छे. तेवी रीते भगवान आत्मा करण छे अने ज्ञाता-द्रष्टाना परिणाम, आनंदना परिणाम ए एनुं कार्य छे. राग ए आत्मानुं कर्म नथी, ए पुद्गलनुं कर्म छे. अहा! आखी जिंदगी धर्म मानीने व्रतादि पाळवामां गाळी होय एने माटे पूर्व-पश्चिमनो फेर लागे एवी आ आश्चर्यकारी वात छे. परंतु प्रभु! भगवान जिनेश्वरदेवे धर्मसभामां जे कहेली वात छे ते ज आ वात छे.

अहाहा! जेम सोनाना म्यानने सोनानुं म्यान कहेवाय छे पण तलवार नहीं, तेम