Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

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१६० ] [ प्रवचन रत्नाकर भाग-४

पण [पुद्गलकर्मनिमित्तं] पुद्गलकर्मना निमित्तथी [परिणमति] परिणमे छे. [जीवः] जीव [कर्मगुणान्] कर्मना गुणोने [न अपि करोति] करतो नथी [तथा एव] तेम ज [कर्म] कर्म [जीवगुणान्] जीवना गुणोने करतुं नथी; [तु] परंतु [अन्योऽन्यनिमित्तेन] परस्पर निमित्तथी [द्वयोः अपि] बन्नेना [परिणामं] परिणाम [जानीहि] जाणो. [एतेन कारणेन तु] आ कारणे [आत्मा] आत्मा [स्वकेन] पोताना ज [भावेन] भावथी [कर्ता] कर्ता (कहेवामां आवे) छे [तु] परंतु [पुद्गलकर्मकृतानां] पुद्गलकर्मथी करवामां आवेला [सर्वभावानाम्] सर्व भावोनो [कर्ता न] कर्ता नथी.

टीकाः– ‘जीवपरिणामने निमित्त करीने पुद्गलो कर्मपणे परिणमे छे अने पुद्गलकर्मने

निमित्त करीने जीव पण परिणमे छे’-एम जीवना परिणामने अने पुद्गलना परिणामने अन्योन्य हेतुपणानो उल्लेख होवा छतां पण जीव अने पुद्गलने परस्पर व्याप्यव्यापकभावना अभावने लीधे जीवने पुद्गलपरिणामो साथे अने पुद्गलकर्मने जीवपरिणामो साथे कर्ताकर्मपणानी असिद्धि होईने, मात्र निमित्त-नैमित्तिकभावनो निषेध नहि होवाथी, अन्योन्य निमित्तमात्र थवाथी ज बन्नेना परिणाम (थाय) छे; ते कारणे (अर्थात् तेथी), जेम माटी वडे घडो कराय छे तेम पोताना भाव वडे पोतानो भाव करातो होवाथी, जीव पोताना भावनो कर्ता कदाचित् छे, परंतु जेम माटी वडे कपडुं करी शकातुं नथी तेम पोताना भाव वडे परभावनुं करावुं अशकय होवाथी (जीव) पुद्गलभावोनो कर्ता तो कदी पण नथी ए निश्चय छे.

भावार्थः– जीवना परिणामने अने पुद्गलना परिणामने परस्पर मात्र

निमित्तनैमित्तिकपणुं छे तोपण परस्पर कर्ताकर्मभाव नथी. परना निमित्तथी जे पोताना भाव थया तेमनो कर्ता तो जीवने अज्ञानदशामां कदाचित् कही पण शकाय, परंतु जीव परभावनो कर्ता तो कदी पण नथी.

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समयसार गाथा ८०–८१–८२ः मथाळुं

जोके जीवना परिणामने अने पुद्गलना परिणामने अन्योन्य निमित्तपणुं छे तोपण कर्ताकर्मपणुं नथी एम हवे कहे छे. अहीं अज्ञानीनी वात छे. आगळनी गाथाओमां भेदज्ञानीनी वात हती. अहीं जीवना परिणाम कहेतां विकारी परिणामनी वात छे. पहेलांनी गाथाओमां जीवना परिणाम एटले निर्मळ वीतरागी परिणामनी वात हती.

पहेलां ‘पोताना परिणामने जाणतो आत्मा’-एम कहेलुं ए जीवना वितरागी निर्मळ परिणामनी वात हती; अने‘पुद्गल परना परिणामने जाणतुं नथी’-एम कहेलुं त्यां पण परना परिणाम एटले जीवना निर्मळ वीतरागी परिणामनी वात हती. आ वात गाथा ७प थी ७९ सुधीमां आवी गइ छे.