Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

< Previous Page   Next Page >


PDF/HTML Page 933 of 4199

 

समयसार गाथा ८०-८१-८२ ] [ १६१

अहीं अज्ञानीनी वात छे. एटले मिथ्यात्व अने राग-द्वेषना परिणामने अहीं जीवना परिणाम कह्या छे; अने पुद्गल परिणाम एटले जड कर्मनी दशानी वात छे. ते बन्नेने परस्पर निमित्तमात्रपणुं छे. एटले जीवना विकारी परिणाम ते पुद्गलकर्मना परिणामनुं निमित्त छे अने पुद्गलकर्मनो उदय ते जीवना राग-द्वेष परिणामनुं निमित्त छे. छतां ते बन्नेने कर्ताकर्मपणुं नथी एम कहे छे.

कर्म बंधाय एमां जीवनुं (विकारनुं) निमित्तपणुं छे. पण निमित्तपणुं एटले शुं? के निमित्त होय छे, बस. निमित्त छे माटे कर्म बंधाय छे एम एनो अर्थ नथी. कर्मना परमाणुओनो परिणमन-काळ छे तेथी ते कर्मरूपे परिणमे छे त्यार जीवना मिथ्यात्व अने राग-द्वेषना परिणाम निमित्तमात्र छे. निमित्तमात्र एटले भिन्नपणे उपस्थित छे.

पंचास्तिकाय गाथा ६२मां एम कह्युं छे के समय समयना जीवना विकारी परिणाम स्वयं पोताना षट्कारकथी थाय छे. तेमां पर कारकोनी अपेक्षा नथी. जीवना विकारी परिणाम पोते पोताथी-पोताना षट्कारकरूप परिणमन थाय छे एमां जडकर्मना कारकनी बीलकुल अपेक्षा नथी. आ विषय पर वर्षा पहेलां चर्चा चालेली. तो सामे पक्षेथी कहे के ए तो अभिन्न कारकनी वात छे. पण अभिन्ननो अर्थ शुं? भाइ! विकारी परिणाम पोते पोताथी स्वतंत्र थाय छे एम एनो अर्थ छे. लोकोने स्वतंत्रपणुं बेसे नहि एटले शुं थाय? भाइ! स्वरूप बहु सूक्ष्म छे. निमित्त छे माटे जीव विकारपणे परिणमे छे एम नथी. अहीं तो निमित्तपणुं छे बस एटलुं ज सिद्ध करवुं छे.

* गाथा ८०–८१–८२ः टीका उपरनुं प्रवचन *

‘जीवपरिणामने निमित्त करीने पुद्गलो कर्मपणे परिणमे छे अने पुद्गलकर्मने निमित्त करीने जीव पण परिणमे छे.’

जुओ कर्मरूपे परिणमवानो पुद्गलनो काळ हतो तेज वखते अहीं जीवमां जे शुभाशुभ रागना परिणाम हता तेने निमित्त कहेवामां आवे छे. निमित्ते तेने परिणमाव्या छे एम नथी. जो निमित्त परिणमावी दे तो निमित्त निमित्त रहे नहि, पण उपादान थइ जाय. कर्म अने आत्मा बन्ने एक थइ जाय. अहीं जे जीव परिणाम कह्या छे ते विकारी परिणामनी वात छे. गाथा ७प थी ७८मां जे जीवपरिणाम कह्या हता ते निर्मळ वीतरागी परिणामनी वात हती. त्यां भेदज्ञानीना परिणामनी वात हती. आ अज्ञानीना परिणामनी वात छे. ज्यां जे जे जेम छे त्यां ते तेम समजवुं जोइए. अहीं कहे छे के जीवना परिणामने निमित्त करीने एटले के जीवना जे मिथ्यात्व अने रागद्वेषना परिणाम छे तेने निमित्त करीने पुद्गलो कर्मरूपे परिणमे छे. परमाणुओ जे