Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

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१६२ ] [ प्रवचन रत्नाकर भाग-४

अकर्म अवस्थाए हता ते कर्मअवस्थारूपे थया ए परमाणुओनो स्वकाळ छे, ए एनी निज क्षण छे, जन्मक्षण छे. निमित्तने लइने एटले विकारने लइने पुद्गलोना परिणमननो काळ थयो छे एम नथी.

जीवमां पण मिथ्यात्व अने राग-द्वेषना परिणाम थवानी निजक्षण छे, अने त्यारे कर्मनो उदय कहेवाय छे. जीवने विकारभावे परिणमवानो काळ छे त्यारे कर्मनो उदय एमां निमित्त छे. कर्मनो उदय(निमित्त) हतो माटे जीवमां राग-द्वेषना विकारी परिणाम थवा अथवा माटे जीवने रागद्वेषभावे परिणमवुं पडयुं एम छे ज नहि. जो एम होय तो निमित्त अने उपादान एटले के कर्म अने जीव बन्ने एक थइ जाय.

अहाहा...! आत्मा अद्भुत चैतन्यचमत्काररूप हीरलो छे. एनी जेने किंमत जणाइ नथी ए जीव मिथ्यात्व अने रागद्वेषपणे परिणमे छे. ते विकारी भावनुं ज्यारे हाजरपणुं छे ते वखते पुद्गलनी जे कर्मरूप अवस्था थाय छे ते पुद्गलनुं स्वतंत्र परिणमन छे. त्यारे कोइ कहे के रागद्वेष न कर्या होत तो कर्मबंध न थात? पण भाइ! ए प्रश्न ज कयां छे? (एक अवस्थामां बीजी अवस्थानी कल्पनानो प्रश्न ज कयां छे?) अहीं तो एम वात छे के जीवे राग-द्वेष कर्या माटे पुद्गलने कर्मरूपे परिणमवुं पडयुं एम छे ज नहि.

जीवना परिणामने निमित्त करीने पुद्गलो कर्मपणे परिणमे छे. अहीं ‘निमित्त करीने’-एम शब्द वापर्यो छे. पण एनो अर्थ शुं? निमित्त छे माटे पुद्गल कर्मपणे परिणमे छे एम अर्थ नथी. शुं एने खबर छे के जीवमां राग छे माटे कर्मपणे परिणमुं? अहीं राग छे माटे पुद्गलो दर्शनमोहपणे परिणमे छे एम छे ज नहि. ते काळे परमाणुनी लायकातथी ते ते कर्मनी पर्याय थाय छे. अने त्यारे जीवना विकारी परिणाम एनुं निमित्त कहेवामां आवे छे.

तेवी रीते पुद्गलकर्मने निमित्त करीने जीव पण परिणमे छे. एटले के जीव स्वयं स्वाधीनपणे रागद्वेषरूपे परिणमे त्यारे जड कर्मनो उदय निमित्तमात्रपणे छे. कर्मनो उदय निमित्त छे माटे जीव रागद्वेषपणे परिणमे छे एम नथी. ते काळे जीवने रागद्वेषरूपे थवानो स्वकाळ छे अने त्यारे कर्मनो उदय निमित्त छे बस. निमित्त करीने एटले के त्यां निमित्तपणुं छे, हाजरी छे बस एटली वात छे. जुओ बन्नेनो काळ एक ज छे. तो पछी आ छे तो आ थयुं एम कयां रह्युं? फकत निमित्त छे एटली वात छे. जीवना परिणाम एक समयनुं सत् पोताथी छे. कर्मपरिणामनो उत्पाद थयो माटे छे एम नथी. अने जीवना रागद्वेषना परिणामनो उत्पाद थयो माटे ते काळे कर्मना परिणाम थया एम पण नथी. ‘निमित्त करीने’ जे कह्युं छे एनो अर्थ एटलो ज छे के निमित्त होय छे.

जेटला प्रमाणमां जीवने रागद्वेष परिणाम होय तेटला प्रमाणमां चारित्रमोहनीय कर्म बंधाय छे. मिथ्यात्वना पण अनंत रस छे. जेटला प्रमाणमां मिथ्यात्वनो भाव