२०८ ] [ प्रवचन रत्नाकर भाग-४
पोते उपजावे तो अनंत अनंतपणे रही शके. परथी उपजे तो बधो खीचडो थई जाय अने अनंत अनंतपणे न रहे.
उत्तरः– हा, अग्नि विना पाणी उनुं थयुं छे; केमके अग्निनी पर्याय अने पाणीनी पर्याय वच्चे अन्योन्याभाव छे. जेम बे द्रव्यो-जड अने चेतन द्रव्यो वच्चे अत्यंताभाव छे तेम परमाणु, परमाणुनी पर्याय वच्चे अन्योन्याभाव छे. बापु! आ तो धर्मनी अति सूक्ष्म वात छे. एने समजवा बुद्धिने सूक्ष्म करवी जोईए. कह्युं छे ने के- ‘हुं करुं, हुं करुं ए ज अज्ञानता शकटनो भार जेम श्वान ताणे.’ जेम भरेलुं गाडुं चाल्युं जतुं होय त्यां एनी नीचे चालता कुतरानुं माथुं उपर गाडाने अडके एटले कुतरुं मानी ले के गाडानो भार हुं खेंचुं छुं. तेम दुकाने बेसी मालनी ले-वेचना विकल्प करे त्यां माने के आ वेपारनी बधी क्रिया माराथी थाय छे. ते अज्ञानी पण आ कुतराना जेवी मिथ्या कल्पना करे छे.
उत्तरः– ना, गाडु बळदथी चालतुं नथी पण ते पोताथी चाले छे. एक एक रजकण पोतानी पर्यायथी स्वतंत्र गति करे छे. परना कारणे गति थती नथी. प्रश्नः– मोटर पेट्रोलथी चाले छे ए तो देखीतुं सत्य छे ने?
पोतानी क्रियावर्ती शक्तिथी स्वतंत्र गति करे छे. भाई! आवा शुद्ध निर्भेळ तत्त्वनी खबर विना कोई बहारथी व्रत -पडिमा लई ले अने तेथी धर्म थशे एम माने पण एथी तो मिथ्यात्व थाय छे. आवी वात छे.
ने?
मुसाफरना पोताना कारणे थाय छे. कोईनाथी कोईनी गति छे एम छे ज नहि. समजाय छे कांई? हा, समजाय तो छे पण अंदर वात बेसती नथी. समजीने बेसाडे तो बेसे एम छे. दरेक परमाणु अने दरेक जीवनी अवस्था प्रथम हती ते पलटीने बीजी थई ते क्रिया छे. ते क्रिया परिणामस्वरूप होवाथी परिणामथी