समयसार गाथा ८प ] [ २०९
भिन्न नथी अने परिणाम परिणामीथी भिन्न नथी माटे ते परिणाम बीजाथी थया छे एम बीलकुल नथी. ते ते परिणाम पोताना परिणामी द्रव्यथी ज थया छे.
मोक्षमार्गना परिणामनुं द्रव्य कर्ता नथी एम जे कह्युं छे ए बीजी वात छे. त्यां सामान्य ध्रुव नित्य एकरूप वस्तु पर्यायमां आवती नथी ए अपेक्षाए वात छे. अने अहीं तो ते ते पर्याय द्रव्यनी छे, परनी नथी एम सिद्ध करवुं छे. परिणाम कहो के पर्याय कहो- एक ज वात छे. परिणाम परिणामी द्रव्यना छे, पर-निमित्तना नथी अने निमित्तने लईने थया नथी-एम अहीं कहेवा मागे छे. जुओ, आटामांथी कणेक बदलाईने रोटली थाय छे ते क्रिया छे. ते क्रिया परिणामस्वरूप होवाथी परिणाम ज छे. रोटली परिणाम ज छे. अने रोटलीरूप परिणाम परिणामीथी (आटाना परमाणुथी) भिन्न नथी. माटे परथी एटले के बाईथी के वेलण वगेरेथी रोटली थई छे ए वात रहेती नथी.
आ आगममंदिरना आरसमां अक्षरो कोतरवानुं मशीन परदेशथी आव्युं ते तेनी परिणामस्वरूप क्रिया थई. ते क्रिया परिणामथी भिन्न नथी अने परिणाम परिणामीथी भिन्न नथी. माटे मशीन बीजाने लईने अहीं आव्युं एम छे ज नहि.
प्रश्नः– परंतु बीजो एमां निमित्त तो छे ने?
उत्तरः– भाई! आ निमित्तनी ज वात चाले छे के जे क्रिया थई ते निमित्तथी थई नथी; त्यारे तो एने निमित्त कहेवामां आवे छे.
प्रश्नः– महेनत करी त्यारे मशीन अहीं आव्युं ने?
उत्तरः– महेनत एटले विकल्प कर्यो. ए विकल्प पहेलां न हतो अने थयो ते क्रिया थई. ए क्रिंया परिणामस्वरूप होवाथी परिणामथी एटले विकल्पथी भिन्न नथी. अने ते परिणाम-विकल्प परिणामी द्रव्यथी भिन्न नथी. तेथी ते विकल्पनुं कर्ता जीव द्रव्य छे, पण मशीनना परिणमननो कर्ता जीव नथी. (मशीनने लईने विकल्प नथी अने विकल्पने लईने मशीनना परिणाम नथी).
भाई! नवतत्त्वनी श्रद्धा थई कयारे कहेवाय? अजीवनी पर्याय अजीवना द्रव्य-गुणथी थाय छे, परथी नहि एम निश्चित थाय त्यारे अजीवनी श्रद्धा थई कहेवाय. आ तो व्यवहार श्रद्धा छे. निश्चय श्रद्धा तो ज्यारे परिणाम निज आत्मद्रव्यसन्मुख थईने त्रिकाळी द्रव्यस्वभावनी प्रतीति करे त्यारे प्रगट थाय छे अने ते सम्यग्दर्शन छे. त्यां मिथ्यात्व पलटीने जे सम्यग्दर्शननी पर्याय थई ते क्रिया छे. ते क्रिया परिणामस्वरूप होवाथी परिणाम ज छे, अने परिणाम परिणामी द्रव्यथी अभिन्न छे. माटे सम्यग्दर्शननो कर्ता जीव छे. दर्शनमोहनो अभाव थयो माटे सम्यग्दर्शन प्रगट थयुं एम छे ज नहि.