Samaysar-Gujarati (Devanagari transliteration).

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कहानजैनशास्त्रमाळा ]

सर्वविशुद्धज्ञान अधिकार
५७१
ज्ञानमधर्मो न भवति यस्मादधर्मो न जानाति किञ्चित्
तस्मादन्यज्ज्ञानमन्यमधर्मं जिना ब्रुवन्ति ।।३९९।।
कालो ज्ञानं न भवति यस्मात्कालो न जानाति किञ्चित्
तस्मादन्यज्ज्ञानमन्यं कालं जिना ब्रुवन्ति ।।४००।।
आकाशमपि न ज्ञानं यस्मादाकाशं न जानाति किञ्चित्
तस्मादाकाशमन्यदन्यज्ज्ञानं जिना ब्रुवन्ति ।।४०१।।
नाध्यवसानं ज्ञानमध्यवसानमचेतनं यस्मात्
तस्मादन्यज्ज्ञानमध्यवसानं तथान्यत् ।।४०२।।
यस्माज्जानाति नित्यं तस्माज्जीवस्तु ज्ञायको ज्ञानी
ज्ञानं च ज्ञायकादव्यतिरिक्तं ज्ञातव्यम् ।।४०३।।

के [धर्मः किञ्चित् न जानाति] धर्म कांई जाणतो नथी, [तस्मात्] माटे [ज्ञानम् अन्यत्] ज्ञान अन्य छे, [धर्मं अन्यं] धर्म अन्य छे[जिनाः ब्रुवन्ति] एम जिनदेवो कहे छे. [अधर्मः ज्ञानं न भवति] अधर्म (अर्थात् अधर्मास्तिकाय) ज्ञान नथी [यस्मात्] कारण के [अधर्मः किञ्चित् न जानाति] अधर्म कांई जाणतो नथी, [तस्मात्] माटे [ज्ञानम् अन्यत्] ज्ञान अन्य छे, [अधर्मं अन्यम्] अधर्म अन्य छे[जिनाः ब्रुवन्ति] एम जिनदेवो कहे छे. [कालः ज्ञानं न भवति] काळ ज्ञान नथी [यस्मात्] कारण के [कालः किञ्चित् न जानाति] काळ कांई जाणतो नथी, [तस्मात्] माटे [ज्ञानम् अन्यत्] ज्ञान अन्य छे, [कालं अन्यं] काळ अन्य छे[जिनाः ब्रुवन्ति] एम जिनदेवो कहे छे. [आकाशम् अपि ज्ञानं न] आकाश पण ज्ञान नथी [यस्मात्] कारण के [आकाशं किञ्चित् न जानाति] आकाश कांई जाणतुं नथी, [तस्मात्] माटे [ज्ञानं अन्यत्] ज्ञान अन्य छे, [आकाशम् अन्यत्] आकाश अन्य छे[जिनाः ब्रुवन्ति] एम जिनदेवो कहे छे. [अध्यवसानं ज्ञानम् न] अध्यवसान ज्ञान नथी [यस्मात्] कारण के [अध्यवसानम् अचेतनं] अध्यवसान अचेतन छे, [तस्मात्] माटे [ज्ञानम् अन्यत्] ज्ञान अन्य छे [तथा अध्यवसानं अन्यत्] तथा अध्यवसान अन्य छे (एम जिनदेवो कहे छे).

[यस्मात्] कारण के [नित्यं जानाति] (जीव) निरंतर जाणे छे [तस्मात्] माटे [ज्ञायकः जीवः तु] ज्ञायक एवो जीव [ज्ञानी] ज्ञानी (ज्ञानवाळो, ज्ञानस्वरूप) छे, [ज्ञानं च] अने ज्ञान [ज्ञायकात् अव्यतिरिक्तं] ज्ञायकथी अव्यतिरिक्त छे (अभिन्न छे, जुदुं नथी) [ज्ञातव्यम्] एम जाणवुं.