Samaysar-Gujarati (Devanagari transliteration). 22,23,24,25,26,27,28,29,30.

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कहानजैनशास्त्रमाळा ]

परिशिष्ट
६१३

करणोपरमात्मिका अकर्तृत्वशक्तिः २१ सकलकर्मकृतज्ञातृत्वमात्रातिरिक्तपरिणामानुभवो- परमात्मिका अभोक्तृत्वशक्तिः २२ सकलकर्मोपरमप्रवृत्तात्मप्रदेशनैष्पन्द्यरूपा निष्क्रियत्व- शक्तिः २३ आसंसारसंहरणविस्तरणलक्षितकिञ्चिदूनचरमशरीरपरिमाणावस्थितलोकाकाश- सम्मितात्मावयवत्वलक्षणा नियतप्रदेशत्वशक्तिः २४ सर्वशरीरैकस्वरूपात्मिका स्वधर्म- व्यापकत्वशक्तिः २५ स्वपरसमानासमानसमानासमानत्रिविधभावधारणात्मिका साधारणा- साधारणसाधारणासाधारणधर्मत्वशक्तिः २६ विलक्षणानन्तस्वभावभावितैकभावलक्षणा अनन्त- धर्मत्वशक्तिः २७ तदतद्रूपमयत्वलक्षणा विरुद्धधर्मत्वशक्तिः २८ तद्रूपभवनरूपा तत्त्व- शक्तिः २९ अतद्रूपभवनरूपा अतत्त्वशक्तिः ३० अनेकपर्यायव्यापकैकद्रव्यमयत्वरूपा एकत्व- (जे शक्तिथी आत्मा ज्ञातापणा सिवायना, कर्मथी करवामां आवता परिणामोनो कर्ता थतो नथी, एवी अकर्तृत्व नामनी एक शक्ति आत्मामां छे.) २१. समस्त, कर्मथी करवामां आवता, ज्ञातृत्वमात्रथी जुदा परिणामोना अनुभवना (


भोगवटाना) उपरमस्वरूप अभोक्तृत्वशक्ति. २२. समस्त कर्मना उपरमथी प्रवर्तती आत्मप्रदेशोनी निष्पंदतास्वरूप (अकंपतास्वरूप) निष्क्रियत्वशक्ति. (सकळ कर्मनो अभाव थाय त्यारे प्रदेशोनुं कंपन मटी जाय छे माटे निष्क्रियत्वशक्ति पण आत्मामां छे.) २३. जे अनादि संसारथी मांडीने संकोचविस्तारथी लक्षित छे अने जे चरम शरीरना परिमाणथी कांईक ऊणा परिमाणे अवस्थित थाय छे एवुं लोकाकाशना माप जेटला मापवाळुं आत्म - अवयवपणुं जेनुं लक्षण छे एवी नियतप्रदेशत्वशक्ति. (आत्माना लोकपरिमाण असंख्य प्रदेशो नियत ज छे. ते प्रदेशो संसार-अवस्थामां संकोचविस्तार पामे छे अने मोक्ष - अवस्थामां चरम शरीर करतां कांईक ओछा परिमाणे स्थित रहे छे.) २४. सर्व शरीरोमां एकस्वरूपात्मक एवी स्वधर्मव्यापकत्वशक्ति. (शरीरना धर्मरूप न थतां पोताना धर्मोमां व्यापवारूप शक्ति ते स्वधर्मव्यापकत्वशक्ति.) २५. स्व - परना समान, असमान अने समानासमान एवा त्रण प्रकारना भावोना धारणस्वरूप साधारण - असाधारण - साधारणासाधारणधर्मत्वशक्ति. २६. विलक्षण (परस्पर भिन्न लक्षणोवाळा) अनंत स्वभावोथी भावित एवो एक भाव जेनुं लक्षण छे एवी अनंत-धर्मत्वशक्ति. २७. तद्रूपमयपणुं अने अतद्रूपमयपणुं जेनुं लक्षण छे एवी विरुद्धधर्मत्वशक्ति. २८. तद्रूप भवनरूप एवी तत्त्वशक्ति. (तत्स्वरूप होवारूप अथवा तत्स्वरूप परिणमनरूप एवी तत्त्वशक्ति आत्मामां छे. आ शक्तिथी चेतन चेतनपणे रहे छेपरिणमे छे.) २९. अतद्रूप भवनरूप एवी अतत्त्वशक्ति. (तत्स्वरूप न होवारूप अथवा तत्स्वरूपे नहि परिणमवारूप अतत्त्वशक्ति आत्मामां छे. आ शक्तिथी चेतन जडरूप थतो नथी.) ३०. अनेक पर्यायोमां