१३२ ][ श्री जिनेन्द्र
श्री कुंदकुंदाचार्य देव – स्तवन
आज मंगळ दिन महा ऊगीयो रे,
आजे घेर घेर मंगळमाळ.....आज आचार्यपद
सोहामणां रे........
कुंदकुंद आचार्य अहो जागीया रे,
भरतक्षेत्रनां अहो भाग्य.....आज आचार्यपद.....१
प्रमत्त अप्रमत्ते झूलता रे,
जिनमुद्राधारी भगवंत.....आज आचार्यपद.....२
देह छतां देहातीत देव छो रे,
ॠद्धि लब्धि तणो नहीं पार....आज आचार्यपद....३
ज्ञान अनेकान्त बळवान छे रे,
श्रुतकेवळीनी छे साख.....आज आचार्यपद.....४
आचार्यपदे मुनि कुंदने रे,
स्थापे इंद्र नरेन्द्रो आज.....आज आचार्यपद.....५
देवेन्द्रगण आज आवीया रे,
मनुष्यजन बहु ऊभराय.....आज आचार्यपद.....६
चौदिशमां वाजां वागीयां रे,
आचार्यपददिन आज.....आज आचार्यपद.....७
महाविदेहक्षेत्रमां चालीया रे,
नीहाळ्या सीमंधरनाथ.....आज आचार्यपद.....८