Shri Jinendra Bhajan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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श्री मुनिराजस्तवन
(जब चले गये गीरनार)
हे परम दिगंबर यति, महा गुणव्रती, करो निस्तारा,
नहीं तुम बिन हितु हमारा....
तुम बीस-आठ गुण धारी हो, जग जीवमात्र हितकारी हो,
बावीस परिषह जीत धरम रखवारा....
नहीं तुम बिन हितु हमारा.....
तुम आतमज्ञानी ध्यानी हो, प्रभु वीतराग वनवासी हो,
है रत्नत्रयगुण मंडित हृदय तुम्हारा....
नहीं तुम बिन हितु हमारा....
तुम क्षमा शांति समता सागर, हो विश्वपूज्य नर रत्नाकर,
है हित
मितसत उपदेश तुम्हारा प्यारा....
नहीं तुम बिन हितु हमारा....
तुम धर्म मूर्ति हो समदर्शी, हो भव्यजीव मन आकर्षी,
है निर्विकार निर्दोष स्वरूप तुम्हारा....
नहीं तुम बिन हितु हमारा....
है यही अवस्था एक सार, जो पहुंचाती है मोक्षद्वार,
सौभाग्य आपसा बाना होय हमारा....
नहीं तुम बिन हितु हमारा.....
१३६ ][ श्री जिनेन्द्र