Shri Jinendra Bhajan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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श्री जिनवाणीस्तवन
धन्य जिनवाणी, धन्य जिनवाणी, धन्य जिनवाणी माता....
पलपल होजो शरण तमारुं आनंद मंगल कार....
जिनेन्द्रदेव के मुख कमळ में सोहे मोरी माता,
महिमा तोरी अपरंपारा जाउं बलिबलि हारा....धन्य०
सलिल समान कलिमलभंजन बुध जन रंजनहारी,
रत्नत्रयना पोषण करती नितनित मंगलकारी. धन्य०
जिनवाणी को जिसने अपनी सच्ची मात बनाई,
फिर नहीं करनी पडती उसको जगमें माता कोई. धन्य०
तीन लोक पति बडेबडे भी आते गोद तिहारी,
आशीष तोरी पाकर माता हो जाते भवपारी. धन्य०
मोक्षके मार्ग दिखाकर तुं तो ज्ञान चक्षु की दाता;
बालक तारा मुक्ति पामे एवी श्रुति माता...धन्य०
‘चेतनरूप अनूप अमूरत’ अब तक नहि पहचानी,
‘सिद्धसम निजपद’को दिखलाकर सिद्धपदमें पहुंचाती...धन्य०
पुनि पुनि जन्म से डरकर जोभी आता गोद तिहारी,
धर्म-जन्म को देकर माता! जन्म नशावनहारी. धन्य०
कान गुरु के अंतर पटमें नित्ये वसती माता,
झरझर झरझर नित्ये झरती मीठी अमृतमाता...धन्य०
भजनमाळा ][ १३७