जैनIंMा – गायन
(तन मन फूला दर्शन पा....)
फरफर फरके केसरीया, गगन शिखा पर झंडा,
गगन शिखा पर झंडा.
चित्त हरषाता......षाता.....चित्त हरषाता......
ऊंचे ऊंचे जिनमंदिर पर छा रहे, छा रहे,
इनकी छाया बैठ जिनगुण गा रहे, गा रहे,
शासन प्रभुका प्यारा रे, होंश जगाता दिलमें,
होंश जगाता दिलमें;
शिर झुक जाता.....जाता, शिर झूक जाता....
फरफर फरके० १
क्या बालक, क्या बूढे, हिलमिल आ रहे, आ रहे,
प्रभु दरशन कर चित्तमें हरषित हो रहे, हो रहे,
सबके मंगल दाता रे, धर्म दीपाता जगमें,
......धर्म दीपाता जगमें,
अनेकान्तवाला......वाला......अनेकान्तवाला.....
फरफर फरके० २
श्री जिनवर के मारग पर सब बढे चलो, बढे चलो,
जिनशासन उन्नत्ति शिखर पर चढें चलो, चढें चलो;
उत्साही बनकर आना रे, आतम धर्मको पाना,
.....आतम धर्मको पाना,
यही दरशाता.....शाता....यही दरशाता......
फरफर फरके० ३
१४६ ][ श्री जिनेन्द्र