आतम गीत सुनाकर माता नींद नशावन हारी,
स्वानुभूति – आनंद के झूले तुं झूलावन हारी...जय० ३
लालन पालन करती माता बोधि समाधि दाता,
बालक तारा मुक्ति पामे एवी मारी माता...जय० ४
जिनवर प्रभुने पूरव भवमां सोलह कारण भाया,
धर्म वृद्धिना उत्तम भावे तीर्थंकर पद पाया...जय० ५
तीर्थंकर के पावन मुखसें तेरी उत्पत्ति माता,
राग के बंधन तोड प्रभुने जब अरहंत पद पाया....जय० ६
मुनि – अर्जिका श्रावक – श्राविका सबको मंगल कारी,
रत्नत्रयीना पोषण करती नित नित आनंदकारी....जय० ७
कोटि जीभतें महिमा तेरी कही शके नहीं कोई,
अल्प मति बालक किम गावें, अधम उद्धारन हारी...जय० ८
जिनवर मुखसे चलती चलती कहानगुरु मुख आई,
मारा गुरुनी वाणी ए तो जाणे जिनधुनि आई....जय० ९
तुज हैयानां हार्द प्रकाशे गुरुवर कहान हमारा,
महिमा सारी जगमां फेलावे एना नंदन तारा...जय० १०
हे जिनवाणी! झंडा तेरा कहानगुरु फरकावे,
फरफर फरफर फरकावीने जिन शासन शोभावे...जय० ११
गुरुजी प्रतापे तुज को पाकर जननी! हम हरषाये,
अनाथ बालक सनाथ होकर आतमकी निधि पाये...जय० १२
✽
भजनमाळा ][ १४५