वीर कुंदने इसे लहराया,
गुरु कहानने फिर फहराया,
भारत भरमें नाद गूंजाया,
झंडा श्री भगवान का....लहरायेगा० ५
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विदेही जिनेन्द्र गुण – स्तवन
( दोहा )
सकल सुखाकर सकल पर, सकल सकल जगनैन,
सीमंधर आदिक सकल, वीस ईश सुख दैन. १.
विहरत अवनि विदेह जहं, मुनिजन होत विदेह,
मैं स्वदेह पावन करन, नमुं नमुं धरि नेह. २.
( छंदः चंडी, १६ मात्रा )
जय जगीश वागीश नमामि, आदि ईश शिव ईश नमामि;
परम ज्योति परमेश नमामि, सेवत शतक सुरेश नमामि. ३.
ब्रह्मा विष्णु महेश नमामि, ज्ञान दिनेश गणेश नमामि;
वीतराग सर्वज्ञ नमामि, करुणावंत कृतज्ञ नमामि. ४.
सृष्टि-इष्ट उत्कृष्ट नमामि, गुणगरिष्ट वच मिष्ट नमामि;
निराकार साकार नमामि, निर्विकार भवपार नमामि. ५.
निर-आमय निकलंक नमामि, जय निरभय चिदअंक नमामि;
ज्ञान गम्य अति रम्य नमामि, स्वयं निकल निर्मोह नमामि. ६.
१४८ ][ श्री जिनेन्द्र