Shri Jinendra Bhajan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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( सुन्दरी छंद )
निज स्वरूप हिये दरसावनी, सकल पातिगताप नसावनी;
अजितकी जयदा जयमाल ही, धरत कंठ लहें शिवबाल ही.
( अडिल्ल छंद )
सीमंधर युगमंधर बाहु सुबाहुजी,
संजातक अरु स्वयंप्रभु सुखदायजी;
ॠषभानन अरु अनंतवीर्य मनमोहने,
सूरप्रभु रू विशालप्रभु अति सोहने.
अवर वज्रधर चंद्रानन अति चारु हैं,
चंद्रबाहु रू भुजंगम इश्वर सार हैं;
नेम प्रभु अरु वीरसेन वरनाम ये,
महाभद्र अरु देवयश हि अभिराम ये.
अजितवीर्य इम विंश परम जिनदेव हैं,
हरें तिमिर मिथ्यात्व करें सब सेव हैं;
इन्हें भक्ति धरि भव्य यजे मन ल्याय के,
ते नर सुरसुख भोगि वरें शिव जाय के.
[ इति श्री सीमंधरादि वीस विद्यमान तीर्थंकर स्तवन संपूर्ण ]
समाप्त
भजनमाळा ][ २०७