Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

< Previous Page   Next Page >


Page 132 of 253
PDF/HTML Page 144 of 265

 

background image
१३२ ][ श्री जिनेन्द्र
सर्वज्ञ वीतरागत जेह,
सो तुम में और न बनै केह. २२.
तुमरो शासन अविरुद्ध देव,
बाकी संशय एकान्त भेव;
तुम कह्यो अनेकान्त सु अनेक,
यह स्याद्वाद हत पक्ष एक. २३.
सो नय प्रमाण जुत सधै अर्थ,
सापेक्ष सत्य निरपेक्ष व्यर्थ;
युकत्यागम परमागम दिनेश,
बाकी निशि चोर इवाकु भेष. २४.
भवि तारण तरण तुहीं समर्थ,
इह जन गही तुम शरण अर्थ;
मो पतित दोष पर चित न देहु,
अपनी बिरदावलि मन धरेहु. २५.
हे कृपासिन्धु यह अर्ज धार,
मैं रोग तिमिर मिथ्या निवार;
मैं नमों पाय जुग लाय शीश,
अब वेग उबारो हे जगीश. २६.
( छंद )
जय जय भवितरक, दुर्गतिवारक, शिवसुख कारक विश्वपते.
हे मम उद्धारक भवदधि पारक, अखिल सुधारक द्रिष्ट इते.