Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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स्तवनमाळा ][ १३३
निर्वाणकल्याणक वर्णन
( दोहा )
समवशरण में विश्वपति, कियौ विश्व व्याख्यान.
मिट्यो जगत मिथ्यात सब, पुनि पहुंचे निरवान. १.
( पद्धरी छंद )
जय घाति प्रकृति त्रेसठ संजोगि,
दो समय पिच्यासी क्षय अयोगि;
परमौदारिक तै गये मुक्त,
जिमिं मूस मांहि आकाश शुक्त. २.
इक समय माँहि उरधस्वभाव,
जिमि अग्निशिखा तनु अंत चाव;
जलमछ इव सहकारीन धर्म,
आगैं केवल आकाश पर्म. ३.
साकार निराकारो व भास,
सहजानंद मग्न सु चिद्दविलास;
गुण आठ आदि राजै अनंत,
गणधरसे कहत न लहत अंत. ४.
चेतन परदेशी अस्त व्यस्त,
परमेय अगुरुलघु दर्वसस्त;
अरु अमूरतीक सु आठ येव,
ये वस्तु स्वभाव सदैव तेव. ५.