Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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स्तवनमाळा ][ १३५
कीनों जिन तन संस्कार सार,
सौधर्म इन्द्र अति हर्ष धार;
पुनि पूज भस्म मस्तक चढाय,
सब देव हु निज निज शीश नाय. १२.
करि चिह्न थान निज गए थान,
पुनि पूजे मुनि जग खग सु आन;
तुम भए सु आदि अनंत देव,
अनुपम अबाध अज अमर सेव. १३.
मैं पर्यो चतुर्गति वन सु माँहि,
दुःख सहे सो तुम से छिपे नाँहि;
तुम करुणानिधि निज वान धार,
संसार खार तैं तार तार. १४.
( धत्तानंद छंद )
जय जय जगसारं, विगत विकारं, करुणागारं शिवकारं;
मम करु निरवारं, हे प्रणधारं, चिद्व्यापारं दातारं.
श्री जिनस्तवन
(लाख लाख दीवडानीराग)
लाख लाख वार जिनराजनां वधामणां,
अंतरीयुं हर्षे उभराय, आज मारे मंगळ वधामणां,
आज मारे दैवी वधामणां,
आज मारे उत्तम वधामणां.