स्तवनमाळा ][ १३९
श्री तीर्थंकर देवनी आ विभूति छे.
जेनो महिमा अगम्य ने अचिंत्य छे. जिनराज. ३.
गुणमंदिर गुणमाल छे ने सुखसमुद्र जिनसाथ छे,
आत्मना आधार छे ने भद्ररूप भगवंत छे;
जेना दर्शनथी जन्म-मरण जाये छे,
जेनी महिमाथी आतमशुद्धि थाये छे....जिनराज. ४.
नंदन सीमंधरनाथना ने सेवकना शणगार छो,
गुणरसी गुरुदेव छो ने भविकना आधार छो;
तुज प्रभाव भरते गाजे छे;
तारा सेवक वारणां उतारे छे....मारा.
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श्री मानस्तंभ – स्तवन
धन्य भाग्य अमारे आंगणे पधार्या मानस्तंभ भगवान,
वधावुं आज हीरले थाळ, भरी भगवान.
सुवर्णपुरीमां आज पधारी न्याल कर्या भगवान,
तुम चरणे प्रभु निशदिन रहीने, करीए आत्मकल्याण,
– वधावुं
महिमा शाश्वत जिननी गाजे, त्रण भुवननी मांही;
सेवकने हो जिननी सेवा, धन्य दिवस धन्य काळ. – वधावुं.
श्री मानथंभे रत्न पटारा, झूले स्वर्गनी मांही;
जिनेन्द्रदेवना वस्त्राभूषण, शाश्वत थंभनी मांही. – वधावुं.