Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

< Previous Page   Next Page >


Page 141 of 253
PDF/HTML Page 153 of 265

 

background image
स्तवनमाळा ][ १४१
पिताजी आंगणे कल्पतरु सोहे,
तीर्थंकर बाळ खेले, पिताजी द्वार लाल;
त्रिलोकीनाथ आजे झूले पारणीये.
माताजी नंदन छे ने जगतनो नाथ छे,
प्रथम रस नयणे सोहे, वारणा उतारुं लाल;
त्रिलोकीनाथ आजे झूले पारणीये.
गुणनिधि गुणसागर प्रभुजी जनम्या,
धन्य धन्य दिवस सोहे, घननन घंटा वागे,
त्रिलोकीनाथ आजे झूले पारणीये.
परम दयाळु करुणाधार कृपाळु छो,
जगतनो नाथ ए, सेवक आधार लाल,
त्रिलोकीनाथ आजे झूले पारणीये.
श्री जिनस्तवन
मारा नाथनी वधाई आजे छे,
मारा स्वामीनी वधाई आजे छे,
एना शब्द गगनमां गाजे छे....मारा.
त्रण ज्ञान विराजीत जन्म्या छे,
त्रण लोकना द्रव्य प्रकाश्या छे,
सुरलोकमां घंटा वाजे छे....मारा.
आज स्वर्गेथी गजराज आव्या छे,
घन घंट चंवर धजा फरक्या छे,
सुर अपछर नृत्य बजावे छे...मारा.