Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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१४४ ][ श्री जिनेन्द्र
पगले पगले गुण गावो जिणंदना,
हैडामां वेणला वहावो जिणंदना,
जन्मोनां दुखडां ए जायसुंदर....७.
धन्य उजमबा माताना नंदन,
ए मंगळमूर्तिने मारा कोटि कोटि वंदन,
तुज पगले पगले प्रभावसुंदर....८.
जिनेन्द्रमहिमा गुरु भरते वहावी,
सत्य स्वरूपनी धून मचावी,
तुज गुणो पर वारी वारी जाउंसुंदर....९.
श्री गुरुदेवस्तवन
(महावीरा तेरी धूनमेंराग)
श्री सद्गुरु करकमळेथी, महामंगळ विधि थाय छे,
महा मंगळ विधि थाय छे, महामंगळ विधि थाय छे.
महा मंगळ विधि थाय छे. १.
आ भरतक्षेत्रमांही, प्रतिष्ठा स्वर्णे गाजे (२)
श्री मानस्तंभ बन्या छे, सुवर्णना मंदिरीयेश्री. २.
श्री जिनवरनां मुखडां नीरखी, गुरुवरनां दिलडां हरखे (२)
ए पुनित हृदयोमांही, श्री जिनवरजी बिराजेश्री. ३.
सुवर्ण सलाका सोहे, श्री गुरुवर करकमलोमां (२)
पुनित अंतर आतमथी, अंकन्यास विधि थाय छेश्री. ४.