Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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१४८ ][ श्री जिनेन्द्र
(साखी)
महाविदेहे बिराजता, सीमंधर भगवान;
समोसरण त्यां सोहता, कंईक नमूनो आंही....
तुज कृपाथी दासे तारो वैभव देखीयो रे,
जेने देखीने गणधरने आश्चर्य थाय;
जेने मान ने मरतबा सहु गळी गया रेमारी. २.
(साखी)
श्री जिनेन्द्र वीतरागदेव, विदेही भगवान;
वीतरागता छाई रही, स्वपर प्रकाशक ज्ञान.
प्रभुजी तारे पगले पगले मारे आववुं रे,
हुं तो ज्यां जोऊं त्यां देखुं मारो नाथ,
एवा नाथ मारा हैडामां नित्ये वसो रेमारी.
प्रभुजी बीजुं मारे जोवानुं नहि काम,
मारा हृदये एक वीतरागता वसी रहो रेमारी. ३.
(साखी)
अनंत चतुष्टययुक्त हो, त्रण भुवनना नाथ;
आतमपद दातार हो, धरता निजगुण राश.
आवो आवो एवा जिनवर मारे मंदिरे रे,
हुं तो कई विध वंदु कई विध पूजुं नाथ;
मारे आंगण आजे त्रिलोकीनाथ पधारीया रेमारी. ४.