Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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स्तवनमाळा ][ १४७
हैडाना हार आवो, आतम शणगार पधारो, (२)
पावन सेवकने करीने, सेवक सामुं निहाळोआज. ३.
कई विध वंदु स्वामी, कई विध पूजुं स्वामी, (२)
त्रिलोकीनाथ पधार्या, अम सेवकना आंगणीयेआज. ४.
श्री मानस्तंभ सोहे, सीमंधरनाथ बिराजे, (२)
विभूति जगनी आवे, श्री जिनवरना चरणोमांआज. ५.
ध्यान धुरंधर स्वामी, वीतराग विलासी स्वामी, (२)
सुखमंदिर जिनवरदेवा, हम रहीए तुज चरणोमांआज. ६.
त्रिलोकीनाथ चरणे, मुक्तिनुं सुख निहाळुं, (२)
दिनरात जिनने ध्यावुं, अंतरमां नाथ वसावुंआज. ७.
गुरु कहाने जिनने निरखे, हैडामां हरखी जाये, (२)
तुज वारणा उतारे, सुवर्ण मंगल थायेआज. ८.
गुरु कहानना प्रतापे, जिनराज भेट्या आजे, (२)
आ पंचमकाळ भूलाये, नित नित मंगळ थायेआज. ९.
श्री जिनस्तवन
(सुंदर सुवर्णपुरीमांराग)
मारी सुवर्णपुरीमां मानस्तंभ पधारीया रे;
श्री जिनेन्द्रदेवना वैभवनी शी वात,
मारे आंगण आजे कल्पवृक्ष ऊगीयो रे,
मारुं हैडुं हरखे हलमल हलमल थाय,
मारा उरमां आजे सोना सूरज ऊगीयो रेमारी. १.