स्तवनमाळा ][ १५१
पीठ प्रथम श्री कुंद-सीमंधर मिलन मनोहर सोहे,
नेमप्रभु, वसु मंगळ, पावन, परमेष्ठी मन मोहे;
— द्रश्य शा मधुमधुरा लागे,
उरे शा भाव अहो! जागे.
पीठ बीजी गुरु कहान बिराजे, ज्योत विदेही भरतमां,
श्रुत सोंपे धरसेन, कुंदमुनि ज्योत भरे भाजनमां;
— ज्योतिधर जय जय हो जगमां,
अमोने अजवाळो उरमां....स्वर्ण०
पीठ त्रीजी गौतम-ध्वजदर्शन, केवळ मल्लिकुंवरने,
देव करे अभिषेक, ईक्षुरसदान ॠषभमुनिवरने;
—धन्य जिन-गणधर-मुनिवरने,
मुक्तिपुर-पंथ-प्रवासीने.
पीठत्रयी पर मंदिर मनहर, स्वस्तिक मंगळकारी,
घंट-माळ-अभिराम दंड पर ऊंचे देरी अनेरी;
— धर्मध्वज गगनविहारी रे,
भविक-मन पावनकारी रे....स्वर्ण०
नीचे उपर नाथ चतुर्दिश, पद्मासन अति प्यारा,
पाद पडे त्यां तीरथ उत्तम, द्रष्टि पड्ये भव पारा;
— नाथ मुज आया आया रे,
सुवर्णे अमृत ऊभराया.
चेतनबिंब जिनेश्वरस्वामी, ध्यानमयी अविकारा,
दर्पण सम चेतन-पर्यय-गुणद्रव्य दिखावनहारा;
— नाथ चिद्रूप दिखावे रे,
परम ध्रुव ध्येय शिखावे रे....स्वर्ण०