Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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स्तवनमाळा ][ १५७
इत्यादि अनेक सुभेद बताय,
सुभव्य दिये शिवपंथ लगाय;
सुजोग निरोध कियौ शिववास,
करौ हमरो नज पास निवास.
श्री जिनस्तवन
हे त्रिभुवनगुरु जिनवर, परमानदैकहेतु हितुकारी,
करहु दया किंकर पर प्राप्ति ज्यों होय मोक्ष सुखकारी.
हे अर्हन् भवहारी भवथितिसे मैं भयौ दुखी भारी,
दया दीन पर कीजे, फिर नहिं भववास होय दुखकारी.
जगउद्धार प्रभो! मम, करि उद्धार विषम भवजलसे;
बारबार यह विनती करता हूं मैं पतित दुखी दिलसे.
तुम प्रभु करुणासागर, तुम ही अशरणशरण जगतस्वामी,
दुखित मोहरिपुसे मैं, यातैं करता पुकार जिननामी.
एक गांवपति भी जब, करुणा करता प्रबल दुखित जन पर,
तब हे त्रिभुवनपति तुम, करुणा क्यों न करहु फिर मुझ पर.
विनती यही हमारी, मेटो संसारभ्रमण भयकारी,
दुखी भयौ मैं भारी, तातैं करता पुकार बहुवारी.
करुणामृतकर शीतल, भवतपहारी चरणकमल तेरे,
रहें हृदयमें मेरे जबतक हैं कर्म मुझे जग घेरे.
पद्मनंदि गुण बंदित, भगवन्! संसारशरण उपकारी,
अंतिम विनय हमारी, करुणा कर करहु भवजलधि पारी.