स्तवनमाळा ][ १९५
स्वर्ण नगरकी छटा नीराली,
कण कणमें छाई हरियाली,
श्री जिन – मानस्तंभ प्रतिष्ठा खिला हजारा रे....प्रतिष्ठा
....खिला हजारा रे....धन्य धन्य दिन आज० १
दूर दूर सें दर्शक आये,
भक्तिभाव भर मन हर्षाये,
ज्ञानज्योति फैली जिमि मानो चंद्र उजाला है....
मानो चंद्र उजाला है....धन्य धन्य दिन आज० २
गुरु कहान का प्रवचन – झरना,
अध्यातम – कथनी मन हरना,
सुधामयी झरता है झरझर गंगाधारा रे....
धन्य धन्य दिन आज० ३
अमर रहे ‘सौभाग्य’ आज सा,
जैनधर्म हो विश्व ताजसा,
चलें अहिंसा पावन पथ पर जो प्रभु धारा है.....
पथ पर जो प्रभु धारा है....धन्य धन्य दिन आज० ४
उत्सव मानस्तंभ का
(हवामें ऊडता)
यह आज सभी मन भाया शुभ उत्सव मानस्तंभका.....
(शुभ उत्सव मानस्तंभका....शुभ उत्सव मानस्तंभका.....
शुभ उत्सव मानस्तंभका....यह०)
मन फूला नहीं समाया लख उत्सव मानस्तंभका....