Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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१९४ ][ श्री जिनेन्द्र
जन्मनी वधााइ
(सावन आयो रे)
जागो रे सोनेवालो दुनिया सब जागी है....
शौरीपुर नृपके द्वारे जय जय के लग रहे नारे,
देवी शिवाने प्रिय सुत जायो बडभागी है....जागो....१
निःकलंक और निष्कामी है तीन ज्ञानधर नामी,
बालकप्रभुदर्शनको जनता सब जागी है...जागो....२
गजारूढ प्रभुको करके कर छत्र चमर सुर हरखे,
अतिशय नहवन लख शचि वर नाचण लागी है....जागो....३
घरघर पर तोरण झालर जग रहे हैं दीप उजागर,
ऊंची ध्वजा लहराती शिवपथ अनुरागी है...जागो....४
हिंसाकृत पाप हटाने, जगका ‘सौभाग्य’ दिपाने,
प्रगटे सुगुरु के स्वामी, दूषण जग त्यागी है....जागो....५
मानस्तंभ प्रतिÌा
(तूही है पारस प्यारा रे....)
धन्य धन्य दिन आज....समय यह कैसा प्यारा है....
समय यह कैसा प्यारा है....धन्य धन्य दिन आज.
समवसरण सुखकार लगा सीमंधर प्यारा है.....
...लगा सीमंधर प्यारा है....धन्य धन्य दिन आज.
श्री मानस्तंभ मनहार, मनो विदेहसे आया है.....
मनो विदेहसे आया है....धन्य धन्य दिन आज.