Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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स्तवनमाळा ][ १९३
स्वर्ण नगर मx उत्सव
(तेरा दरश पाया....पायाए राग)
जिनगुण गावो हर्षावो, उत्सव मनावो,
आओ सभी नर नारी....नारी....सभी नर...नारी.
स्वर्णनगरमें छटा स्वर्गसी छाज रही छाज रही,....
बीन बांसुरी सरस सनाई बाज रही...बाज रही;...
सुर नर मुनि जय जय गाते, दर्शन कर जिन वैभव
महापुण्यकारी महापुण्यकारी, कारी....१
समवसरण के सनमुख सुंदर सोहना...सोहना....
मानस्तंभ मनोज्ञ बना मन मोहना....मोहना....
तीन पीठ चित्राम घने, मध्य बिराजे, जिनवर प्रभु बिंब
भारी, भारी प्रभु बिंब भारी....२
धन्य धन्य जिन भक्त शिरोमणि कानगुरु....कानगुरु.....
वीतराग जिन धर्म सुभूषण कानगुरु...कानगुरु....
अध्यात्मके प्रखर प्रतापी धन्य गुरु धन्य गुरु....
जिन उपदेश बने मंदिर मानस्तंभ मनोहर,
महा मानहारी....हारी...महा मानहारी....३
रविशशि जब लग रहें विश्वमें आप जियें...आप जियें
तव मुखचन्द्र सुझरी गिरा अमृत पियें अमृत पियें
निज अनुभव ‘सौभाग्य’ बडे धर्म अहिंसा जगमें
वरे शिवनारी....नारी....वरे शिवनारी....४