१९२ ][ श्री जिनेन्द्र
नेमिप्रभुका निर्वाणोत्सव
(पाये पायेजी)
आवो आवोजी...हां हां....आवो आवो जी जन जग सारे
प्रभु निर्वाण गये....
गुण गावोजी सकल नर नारी, प्रभु शिवथान गये.....
धन्य धन्य यादवकुलभूषण प्रबल प्रतापी नेता;
समुदविजय श्री शिवानंदन जय जय कर्म विजेता...
आवो....१
बंदीग्रहमें लख पशुओंको तोरण से रथ फेरा;
जीवमात्र पर दया दिखाकर वनमें किया बसेरा....
आवो....२
वीतराग निर्ग्रंथ दिगंबर मुनिमुद्रा तपधारी;
आतमध्यान लगाकर पावन कर्म – सैन्यको मारी.....
आवो....३
केवळज्ञानज्योति विस्तारी दोष समूल नशाये;
दे उपदेश अनंत अधम जन भवसे पार लगाये....
आवो....४
अजर अमर अविचल अविनाशी निजानंद पदधारी;
सिद्ध हुए ‘सौभाग्य’ नेमिजिन तिनप्रति धोक हमारी.....
आवो....५
गिरनारी की पंचम टूंक पर चरण प्रभुका सोहे....
दूर दूर से यात्री आकर देख प्रभू मन मोहे..
आवो....६