स्तवनमाळा ][ १९७
श्री जिन – स्तवन
मुझे स्वामी दर्शन दिखाना पडेगा,
पडा घोर सागरसे तिराना पडेगा — मुझे
स्वामी हमने तो जाना परम वीतरागी,
मुझे वीतरागी बनाना पडेगा — मुझे. १
संसारसागर महा दुःख का घर,
मुझे इनसे पार लगाना पडेगा — मुझे. २
मेरी किस्मत गहन भंवरमें पडी है,
किनारे तो अब लगाना पडेगा — मुझे. ३
ये तोफान कर्मने आकर सताया है,
ये कर्मजाळ तुमको हटाना पडेगा — मुझे. ४
सेवककी अरजी सुनकर प्रभुजी,
दुखीया का दुःख हटाना पडेगा — मुझे. ५
श्री जिन – स्तवन
(मेरा सुंदर सपना बीत गया)
तेरे दर्शन कर जिनराज प्रभु, हम सफल हुवे इस जीवनमें,
पा तारणतरण जिहाज प्रभु, तेरे दर्शन कर जिनराज
प्रभु. तेरे
ज्यों रवि लख कमल सरोवर में, होता है विकसित गौरवमें,
त्यों हृदयकमल हैं सरस खिले, सरस खिलो,
पा धर्म दिवाकर आज प्रभु. तेरे. १