१९८ ][ श्री जिनेन्द्र
ओ ओ ओ ओ कर्मरिपु के जेता,
ओ ओ ओ ओ निज स्वराज्य के नेता,
तव पावन पथ अनुगामी हों, गामी हो, हां गामी हों
बस यह विनय रख लाज प्रभु. तेरे दर्शन २
दिन रात तेरा ही ध्यान लगा, मानव में आतम जयोति जगा,
घर घर में सत्य अहिंसा का,
‘सौभाग्य’ बजे सुख साज प्रभु. तेरे. ३
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श्री जिन – स्तवन
(तेरे नैनोंने चोरी किया, मेरा छोटा सा जिया)
तेरे चरणों से प्रीत लगा, मेरा हुलसा है जिया जिनेश्वरा
ओ तेरे चरणों से. टेक
स्वामी तेरे दर्शनमें यह न जाने क्या बात है,
आता जो भी द्वार तुम्हारे तजता नहीं फिर साथ है. तेरे. १
हारे हैं जब गौतम गणधर तेरी महिमा गाने एं,
मेरी क्या सामर्थ प्रभु है, तुझको आज रिझाने में. तेरे २
आतम द्रव्य पिछानूं अपना मिथ्या ममता त्यागूं मैं,
दुर्द्धर तप कर कर्म नशा फिर शिव के मारग लागूं मैं. तेरे. ३
जामनमरण नशा भव फेरी निजानंद पद पाऊं मैं,
जीवन का ‘सौभाग्य’ सफल कर झुक झुक शीश नवाऊं मैं. ४
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