स्तवनमाळा ][ १९९
श्री जिन – स्तवन
(शाहजहां — गम दिये मुस्तकिल)
जब से प्रीत लगी, आतम ज्योति जगी, जिनवर प्यारा,
छूटा छूटा जी संशय हमारा.
पल नहीं छोडे चरण, सुखकर तेरा शरण, संकटहारा,
छूटा छूटा जी संशय हमारा. टेक
अबलों परको थे अपना बता के,
जड – पुद्गल का भेद न पाके,
जीवन खोया वृथा, पाली मिथ्या – प्रथा, धरम बिसारा. १
पाई दर्शन से सच्ची निधि है,
सुखकर ग्रंथो में वरणी विधि है.
सम्यग्ज्ञानी बने, आतम ध्यानी बने, द्रढ चित्त धारा. २
कर्मसैना को जीत भगावें, मुक्ति महलों का ‘सौभाग्य’ पावें
मन्त्र ‘सिद्धं नमः’ अति ही प्यारा हमें; मंगलकारा. ३
श्री जिन – स्तवन
(मोहन की मुरलिया बाजे )
यह शांति छबी मन भाये ओ...नहीं और कोई चित्त चाहे
— टेक
भूल अनेको देव मनाये अब तक तुम्हें बिसारा,
चिंतामणि सा जीवन पाकर, मिथ्या मग में डारा;