Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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२०० ][ श्री जिनेन्द्र
अब पुण्य उदय में आये, ओ...श्री वीतराग प्रभु पाये.
यह०
ज्ञान अनंत दर्श सुख वीरज, की शुभ ज्योति जगी है,
वस्तु भेदविज्ञान निधि की कुंजी हाथ लगी है;
अब आतम बल प्रगटावें, ओ जो कर्मकुकीट मिटावें.
सिद्ध सिंहासन पर शोभित हो, पुनि पुनि जन्म न धारें,
अविचल सुख ‘सौभाग्य’ संपदा, निज पुरमें विस्तारें;
चरणों में शीश झुकावें, ओ.....बस यही सुमंगल गावें.
श्री वीरस्तवन
(‘आवारा’नैया मेरी मझधार)
लिया प्रभु अवतार, जय जयकार, जय जयकार, जय जयकार.
त्रिशलानंद कुमार, जय जयकार, जय जयकार, जय जयकार.
टेक.
आज खुशी है, आज खुशी है,
तुम्हें खुशी है, हमें खुशी है;
खुशियां अपरंपार, जय जयकार, जय जयकार, जय जयकार.
पुष्प और रत्नों की वर्षा, सुरपति करते हर्षा हर्षा,
बजा दुंदुभी सार, जय जयकार, जय जयकार, जय जयकार.
उमग उमग नर-नारी आते, नृत्य, भजनसंगीत सुनाते,
इन्द्र शची ले लार, जय जयकार, जय जयकार, जय जयकार.