२०० ][ श्री जिनेन्द्र
अब पुण्य उदय में आये, ओ...श्री वीतराग प्रभु पाये.
यह० १
ज्ञान अनंत दर्श सुख वीरज, की शुभ ज्योति जगी है,
वस्तु भेदविज्ञान निधि की कुंजी हाथ लगी है;
अब आतम बल प्रगटावें, ओ जो कर्म – कुकीट मिटावें. २
सिद्ध सिंहासन पर शोभित हो, पुनि पुनि जन्म न धारें,
अविचल सुख ‘सौभाग्य’ संपदा, निज पुरमें विस्तारें;
चरणों में शीश झुकावें, ओ.....बस यही सु – मंगल गावें. ३
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श्री वीर – स्तवन
(‘आवारा’ – नैया मेरी मझधार)
लिया प्रभु अवतार, जय जयकार, जय जयकार, जय जयकार.
त्रिशलानंद कुमार, जय जयकार, जय जयकार, जय जयकार.
— टेक.
आज खुशी है, आज खुशी है,
तुम्हें खुशी है, हमें खुशी है;
खुशियां अपरंपार, जय जयकार, जय जयकार, जय जयकार.
पुष्प और रत्नों की वर्षा, सुरपति करते हर्षा हर्षा,
बजा दुंदुभी सार, जय जयकार, जय जयकार, जय जयकार.
उमग उमग नर-नारी आते, नृत्य, भजन – संगीत सुनाते,
इन्द्र शची ले लार, जय जयकार, जय जयकार, जय जयकार.